डेनमार्क: डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के पास ग्लाडसैक्से इलाके में एक अनोखा प्रयोग किया जा रहा है. यहां पारंपरिक सफेद स्ट्रीटलाइट्स की जगह लाल रोशनी वाले लैंप लगाए जा रहे हैं. शुरुआत में यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य बहुत खास है. आपको जानकार हैरानी होगी कि ये रोशनी इंसानों के लिए नहीं, बल्कि चमगादड़ों के लिए बदली गई है.
ग्लाडसैक्से इलाके में चमगादड़ों की एक स्थायी कॉलोनी रहती है. इलाके की सामान्य सफेद लाइट उनके उड़ने, खाने और रास्ता पहचानने में बाधा डालती थी. शोध के अनुसार, लाल रोशनी चमगादड़ों पर सबसे कम नकारात्मक असर डालती है, जबकि सफेद, नीली या हरी रोशनी उनके व्यवहार को प्रभावित करती हैं. जिस कारण यह कदम उठाया जा रहा है.
अधिकारियों ने माना कि चमगादड़ों के लिए पूरी तरह अंधेरा करना सबसे अच्छा होता, लेकिन सड़क सुरक्षा के कारण ऐसा करना संभव नहीं था. इसलिए सिर्फ कुछ सड़क पट्टियों पर लाल रोशनी लगाई गई. चौराहों और क्रॉसिंग पर अभी भी हल्की सफेद रोशनी है, ताकि ड्राइवर और साइकिल चालक आसानी से देख सकें. इस तरह लाइटिंग डिजाइन में इंसानों और जानवरों दोनों का ध्यान रखा गया है.
इस कदम का मुख्य उद्देश्य इंसान और प्रकृति दोनो को संतुलित करना है. रोड इंजीनियर जोनास योर्गेनसन के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ बल्ब बदलने जैसा सरल कदम नहीं है. इसके लिए अध्ययन और योजना बनाई गई. इसका उद्देश्य है कि सड़क का उपयोग जारी रहे और चमगादड़ों की प्राकृतिक गतिविधि भी प्रभावित न हो. डिजाइनर फिलिप जेलवर्ड का कहना है कि यह प्रयोग शहरी प्रकाश व्यवस्था के पारंपरिक तरीके को चुनौती देता है और यह दर्शाता है कि यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है.
फिलहाल, लाल स्ट्रीटलाइट्स का प्रयोग केवल कुछ हिस्सों में किया गया है. हालांकि, यूरोप और अमेरिका के कई शहरों के योजनाकार इसे ध्यान से देख रहे हैं. ऊर्जा बचत, प्रकाश प्रदूषण और जैव विविधता के लिए यह एक अच्छा उदाहरण बन रहा है. यह प्रयोग दिखाता है कि कभी-कभी सड़कें सिर्फ रोशनी से नहीं, बल्कि सोच के बदलाव से भी सुरक्षित बनाई जा सकती हैं.