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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष का केंद्र बन गया है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो बड़े ऑयल टैंकरों पर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है. हूतियों का कहना है कि दोनों जहाजों ने उनके द्वारा घोषित नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.
एन्सेलिया' पर हमले की पुष्टि
हूती संगठन द्वारा निशाना बनाए गए दो टैंकरों की पहचान 'एन्सेलिया' और 'लैला' के रूप में हुई है. इनमें से सऊदी अरब के झंडे वाले टैंकर 'एन्सेलिया' पर हमले की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी कर दी है. रॉयटर्स और समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब के जिजान बंदरगाह के बाहरी इलाके और अल-शुकैक से लगभग 70 नॉटिकल मील दक्षिण-पश्चिम में 'एन्सेलिया' पर मिसाइल से हमला हुआ.
हमले के बाद जहाज के दाहिने हिस्से में आग लगी
हमले के बाद जहाज के दाहिने हिस्से में आग लग गई, जिसे बुझाने में चालक दल के सदस्य जुट गए. ब्रिटेन की 'युनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' और सुरक्षा फर्म वैनगार्ड ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि फिलहाल किसी के हताहत होने या तेल रिसाव से बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है. दूसरे टैंकर 'लैला' पर हुए हमले के दावे का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है. संबंधित एजेंसियां जहाज की स्थिति और नुकसान का आकलन कर रही हैं.
नौसैनिक नाकाबंदी का असर और वैश्विक चिंता
हूती विद्रोहियों ने हाल ही में सऊदी अरब के जहाजों के खिलाफ लाल सागर में नाकाबंदी का ऐलान किया था. हूतियों का दावा है कि उनकी चेतावनियों के कारण अब तक लगभग 10 व्यापारिक जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ा है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, हमले के खतरे को देखते हुए कई ऊर्जा टैंकरों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से दूरी बना ली है और स्वेज नहर की ओर अपना रुख किया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जोखिम
विश्लेषकों की चेतावनी है कि लाल सागर जैसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्ग पर टैंकरों को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है. यदि यह नाकाबंदी लंबी खिंचती है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव खतरनाक मोड़ ले सकता है.