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नहीं बख्शे जाएंगे खालिस्तानी समर्थक! कनाडा हिंदू मंदिर पर हुए हमले को लेकर ट्रूडो सरकार ने लिया एक्शन

कनाडा के ब्रैम्पटन मंदिर पर हुए हमले को लेकर कनाडा पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है. पुलिस ने इस मामले में संलिप्त 35 वर्षीय खालिस्तानी समर्थक को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में इंद्रजीत गोसल नामक व्यक्ति को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है.

Calendar Last Updated : 10 November 2024, 10:20 AM IST
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Canada Hindu Temple: भारत से लेकर कनाडा तक तब विवाद हुआ जब ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर पर कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने हमला बोला दिया. हालांकि इस हमला के बाद कनाडा सरकार के द्वारा यह दावा किया गया था कि इस मामले को मंदिर के पुजारी द्वारा भड़काया गया. जिसके बाद मंदिर के पुजारी को निलंबित भी कर दिया गया. हालांकि अब कनाडा पुलिस ने मामले में संलिप्त 35 वर्षीय खालिस्तानी समर्थक को गिरफ्तार कर लिया है.

अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में इंद्रजीत गोसल नामक व्यक्ति को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है. जिसपर आरोप है कि हिंदू सभा मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान हथियार से हमला किया है. इस मामले में अबतक तीन लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है.  

पुलिस ने दी जानकारी 

कनाडा पुलिस ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 8 नवंबर को गोसल को गिरफ्तार कर लिया गया है. उस पर झड़प के बीच हथियार से हमला करने का आरोप है. हालांकि कुछ ही देर बाद उसे शर्तों के साथ रिहा किया गया. साथ ही उसे बाद में ब्रैम्पटन में ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस में पेश होने का आदेश दिया गया है. बता दें 4 नवंबर को खालिस्तानी समर्थकों ने मंदिर पर अचानक हमला शुरू कर दिया था. हालांकि मामला इतना बढ़ गया कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सामने आकर हिंदु समुदाय की सुरक्षा की वादा की थी. इस घटना पर भारत की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है. 

ट्रूडो सरकार पर लगे गंभीर आरोप

पुलिस ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि 4 नवंबर को घटित हुई घटनाओं की जांच करने के लिए एक स्पेशल रणनीतिक जांच दल का गठन किया गया है. इन जांचकर्ताओं द्वारा घटना के सौ से भी ज्यादा वीडियो का विश्लेषण किया जाएगा. साथ इस वीडियो के माध्यम से ही अपराधियों की पहचान की जाएगी. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. कनाडा में घटी इस घटना के बाद लोगों ने इस मामले पर जमकर बवाल काटा. सोशल मीडिया पर ट्रूडो सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लगाया गया. साथ ही खालिस्तानीयों का समर्थन देने का भी आरोप लगा. 

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