menu-icon
The Bharatvarsh News

चीन से लौटने से पहले ट्रंप डेलिगेशन ने गिफ्ट्स किए नष्ट, जासूसी का शक

डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा खत्म होने के बाद अमेरिकी डेलिगेशन के एक सख्त कदम ने सबको चौंका दिया. जासूसी और डेटा चोरी के खतरे को देखते हुए ट्रंप के डेलिगेशन ने चीन की तरफ से मिले कई सामानों को नष्ट किए जाने की खबर सामने आई है.

Calendar Last Updated : 16 May 2026, 10:33 AM IST
Share:

 नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा खत्म होने के बाद एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दुनियाभर में चर्चा छेड़ दी है. बताया जा रहा है कि अमेरिका लौटने से पहले ट्रंप के डेलिगेशन ने चीन की तरफ से मिले कई सामानों को या तो नष्ट कर दिया या फिर वहीं छोड़ दिया. यह कदम कथित तौर पर जासूसी और डेटा चोरी के खतरे को देखते हुए उठाया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को चीन दौरे के दौरान कई तरह के गिफ्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दिए गए थे. 

इनमें बर्नर फोन, डेलिगेशन बैज, पहचान पत्र और अन्य सामग्री शामिल थी. लेकिन अमेरिका रवाना होने से पहले इन सभी चीजों को इकट्ठा किया गया और एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले उन्हें डस्टबिन में फेंक दिया गया या पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि इन वस्तुओं के जरिए डेटा चोरी या निगरानी की कोशिश हो सकती है. इसी वजह से कोई भी संदिग्ध सामान विमान में ले जाने की अनुमति नहीं दी गई.

पत्रकार ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

अमेरिकी प्रेस दल के साथ चीन गईं 'न्यूयॉर्क पोस्ट' की पत्रकार एमिली गुडिन ने भी इस मामले की जानकारी साझा की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि चीन से जुड़ी कोई भी वस्तु विमान में ले जाने की अनुमति नहीं थी और टीम जल्द ही अमेरिका के लिए रवाना होने वाली थी. हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक न तो ट्रंप प्रशासन और न ही वाइट हाउस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

सुरक्षा एजेंसियों का पुराना प्रोटोकॉल

जानकारों का मानना है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि अमेरिका की सुरक्षा नीति का हिस्सा है. जब भी अमेरिकी अधिकारी किसी ऐसे देश का दौरा करते हैं, जिसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, तब विशेष सुरक्षा नियम लागू किए जाते हैं. इन नियमों के तहत यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संवेदनशील दस्तावेजों को नष्ट कर दिया जाता है, ताकि किसी तरह की साइबर जासूसी या निगरानी का खतरा न रहे. अमेरिका लंबे समय से चीन पर साइबर जासूसी और तकनीकी डेटा चोरी के आरोप लगाता रहा है, इसलिए इस दौरे में सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई.

9 साल बाद चीन पहुंचे थे ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप करीब नौ साल बाद चीन पहुंचे थे. इस दौरान उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई. दोनों नेताओं के बीच यह सातवीं आमने-सामने की बैठक बताई जा रही है. चर्चा के बाद दोनों नेताओं ने चीन के ऐतिहासिक झोंगनानहाई लीडरशिप कंपाउंड में साथ टहलते हुए भी समय बिताया. यह परिसर अपनी पारंपरिक चीनी वास्तुकला, पुराने पेड़ों और खूबसूरत बागों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है.

किन मुद्दों पर हुई अहम बातचीत?

भले ही दौरे के दौरान दोनों देशों ने दोस्ताना माहौल दिखाने की कोशिश की, लेकिन कई बड़े मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं. ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच मुख्य रूप से व्यापार असंतुलन, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, ताइवान का मुद्दा और ईरान में जारी तनाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई.

सम्बंधित खबर

Recent News