US Visa Rules: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में पदभार संभालते ही आव्रजन पर सख्ती शुरू की. उनके प्रशासन ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान आगंतुकों और मीडिया सदस्यों के वीजा अवधि को कम करने का प्रस्ताव रखा. यह कदम कानूनी आव्रजन की निगरानी मजबूत करने का हिस्सा है.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिका में विदेशियों की बेहतर निगरानी संभव होगी. यह नियम 2020 में भी प्रस्तावित था, लेकिन बाइडेन सरकार ने 2021 में इसे रद्द कर दिया था. अब इसे फिर से लाया गया है.
नया नियम F वीजा (विदेशी छात्रों के लिए), J वीजा (सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए) और I वीजा (मीडिया सदस्यों के लिए) पर प्रभाव डालेगा. पहले ये वीजा कार्यक्रम की पूरी अवधि के लिए वैध होते थे. अब ये निश्चित समय के लिए होंगे. F और J वीजा धारकों के लिए अधिकतम 4 साल का समय दिया जाएगा. स्नातक स्तर के F-1 छात्रों के लिए कोर्स बदलने पर रोक लगेगी. स्नातकोत्तर छात्रों की छूट अवधि 60 दिनों से घटकर 30 दिन हो जाएगी. I वीजा के लिए प्रारंभिक प्रवेश 240 दिनों तक सीमित होगा. चीनी नागरिकों के लिए यह 90 दिन का हो सकता है. विस्तार के लिए आवेदन करना पड़ेगा. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने कहा कि इससे वीजा धारकों की नियमित जांच आसान होगी.
यह नियम लाखों लोगों को प्रभावित करेगा. अमेरिका में 2024 में लगभग 16 लाख F वीजा छात्र थे. विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं. वे उच्च ट्यूशन फीस देते हैं और नौकरियां पैदा करते हैं. लेकिन ट्रंप प्रशासन का दावा है कि कुछ छात्र अनिश्चितकालीन 'स्थिति की अवधि' का दुरुपयोग कर रहे हैं. वे लगातार नामांकन कराकर 'हमेशा के छात्र' बने रहते हैं. इससे सुरक्षा जोखिम और करदाताओं का बोझ बढ़ता है. DHS ने कहा कि 2000-2010 में प्रवेश करने वाले दो हजार से अधिक छात्र अभी भी सक्रिय हैं. यह अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचाता है. ट्रंप प्रशासन ने वैचारिक आधार पर वीजा रद्द किए हैं. सोशल मीडिया की जांच भी बढ़ाई गई है. 2025 में 6 हजार से अधिक छात्र वीजा रद्द कर दिए गए हैं. इसके पीछे ज्यादातर अपराध या आतंकवाद समर्थन का कारण दिया गया. 22 अगस्त के ज्ञापन में यूएससीआईएस ने नागरिकता आवेदकों के पड़ोस में दौरा फिर शुरू करने का ऐलान किया. इससे निवास, नैतिक चरित्र और अमेरिकी मूल्यों की पुष्टि होगी. H-1B वीजा के लिए भी बदलाव आ रहे हैं. लॉटरी प्रक्रिया बदलकर मजदूरी और शिक्षा स्तर पर आधारित चयन होगा. ये कदम राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापक आव्रजन अभियान का हिस्सा हैं. हालांकि शिक्षा संगठनों ने इसका विरोध किया है. NAFSA ने कहा कि यह छात्रों और विश्वविद्यालयों के लिए अनावश्यक बाधा बताया है. मिरियम फेल्डब्लम ने चेतावनी दी कि इससे अंतर्राष्ट्रीय छात्र अमेरिका से दूर रहेंगे. वहीं इसका फायदा ब्रिटेन और कनाडा को मिल सकता है.