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ईरान के नेताओं पर मंडराया मौत का साया, अमेरिका ने दी इजरायल पर चौंकाने वाली चेतावनी

अमेरिका ईरान शांति वार्ता के बीच एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को संभावित इजरायली हमले की आशंका को लेकर पहले ही सतर्क किया था.

Calendar Last Updated : 03 July 2026, 11:54 AM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका ने मध्य पूर्व के कई देशों के जरिए ईरान को चेतावनी दी थी कि इजरायल उसके शीर्ष नेताओं को निशाना बना सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि अगर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ की हत्या होती है, तो अप्रैल से चल रही युद्धविराम वार्ता पूरी तरह पटरी से उतर सकती है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने क्षेत्रीय देशों से कहा था कि वे ईरान को संभावित खतरे के बारे में पहले ही आगाह करें, ताकि शांति प्रक्रिया प्रभावित न हो.

इजरायल की रणनीति से बढ़ी मुश्किलें

बताया गया है कि युद्ध की शुरुआत में इजरायल की रणनीति ईरान के बड़े नेताओं को निशाना बनाने की थी. उस समय अमेरिका और इजरायल के उद्देश्य काफी हद तक एक जैसे थे, लेकिन जैसे-जैसे युद्धविराम की बातचीत आगे बढ़ी, दोनों देशों की सोच में अंतर दिखाई देने लगा.

अमेरिका चाहता था कि बातचीत के जरिए तनाव कम किया जाए, जबकि इजरायल ईरान पर दबाव बनाए रखने के पक्ष में था. अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि अगर बातचीत में शामिल नेताओं की हत्या होती है तो संघर्ष दोबारा भड़क सकता है.

शांति समझौते पर बनी रही खींचतान

अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ को ईरान की ओर से शांति वार्ता का अहम चेहरा माना जाता है. दोनों नेताओं ने कई देशों के साथ बातचीत कर युद्धविराम और भविष्य के समझौते की दिशा में भूमिका निभाई है.

रिपोर्ट के अनुसार, जून में अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते का ढांचा तैयार हुआ था. इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और भविष्य में परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की रूपरेखा तय करने की बात शामिल थी. हालांकि, इजरायल इस समझौते से संतुष्ट नहीं था और उसे यह अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के खिलाफ मानता रहा.

गालिबाफ पर हमले की आशंका

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गालिबाफ पहले भी दो बार हमले से बाल-बाल बच चुके हैं. हाल ही में अमेरिका के अधिकारियों से बातचीत के बाद जब वह तेहरान लौट रहे थे, तब ईरानी खुफिया एजेंसियों को कथित तौर पर सूचना मिली कि उनके विमान को निशाना बनाया जा सकता है.

इसके बाद विमान की आपात लैंडिंग कराई गई और गालिबाफ सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचे. हालांकि इन खतरों के बावजूद गालिबाफ और अराघची ने शांति वार्ता के लिए विदेश यात्राएं जारी रखी. अमेरिका का कहना है कि वह अब भी बातचीत के जरिए स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशों को आगे बढ़ाना चाहता है.

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