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दिल्ली में क्लाउड सीडिंग फेल! बारिश नहीं हुई, लेकिन प्रदूषण में आई कमी?

दिल्ली में क्लाउड सीडिंग ट्रायल के लिए आईआईटी कानपुर ने मंगलवार को दिल्ली के ऊपर एक छोटा सिंगल-प्रोपेलर विमान उड़ाया. यह उत्तर-पश्चिम दिल्ली, बुराड़ी, मयूर विहार और नोएडा के इलाकों में घूमा.

Calendar Last Updated : 29 October 2025, 08:21 AM IST
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दिल्ली में क्लाउड सीडिंग ट्रायल के लिए आईआईटी कानपुर ने मंगलवार को दिल्ली के ऊपर एक छोटा सिंगल-प्रोपेलर विमान उड़ाया. यह उत्तर-पश्चिम दिल्ली, बुराड़ी, मयूर विहार और नोएडा के इलाकों में घूमा. विमान ने 16 फ्लेयर्स दागे, इनमें सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड थे. जिसका उद्देश्य कृत्रिम बारिश करवाना था. इससे प्रदूषण कम करने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश नहीं हुई.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे सफल बताते हुए कहा कि यह विज्ञान आधारित पहला कदम है. हम दिल्ली की नमी का आकलन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर परीक्षण से सीख मिलती है. सिरसा ने जोर दिया कि सर्दियों और पूरे साल के लिए योजना बनेगी.

विपक्षी पार्टी ने बोला हमला

आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाए. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि मौसम विभाग ने पहले ही बारिश का अनुमान लगाया था, फिर परीक्षण क्यों? इंद्रदेव बताएंगे क्या यह कृत्रिम है या प्राकृतिक? आप ने 2023 में योजना शुरू की थी, लेकिन मौसम खराब होने से लागू नहीं हुई. पिछली सर्दी में फिर प्रस्ताव दिया लेकिन केंद्र से अनुमति नहीं मिली.

सिरसा ने आप पर सिर्फ बात करने का आरोप लगाया. आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में दो जगहों पर बारिश का जिक्र किया. जिसमें नोएडा में 0.1 मिमी, ग्रेटर नोएडा में 0.2 मिमी बारिश की बात कही गई. आधिकारिक मौसम केंद्रों ने कोई बारिश दर्ज नहीं की, रिपोर्ट में बारिश और सीडिंग का सीधा संबंध नहीं बताया.

आईआईटी ने क्या कहा?

रिपोर्ट ने प्रदूषण पर फोकस किया. सीडिंग से पहले पीएम2.5 का स्तर मयूर विहार में 221, करोल बाग में 230, बुराड़ी में 229 दर्ज की गई. पहली सीडिंग के बाद घटकर 207, 206 और 203 हो गया. रिपोर्ट कहती है, नमी बढ़ने से कण नीचे बैठे, इससे प्रदूषण में कमी आई. शौकिया मौसम विज्ञानी ऐश्वर्या तिवारी ने कहा कि रिपोर्ट में सिर्फ संभावित बारिश है, विंडी मॉडल है, असल नहीं. आईआईटी ने माना, नमी 10-15% कम थी. लेकिन कम नमी में प्रभाव जानने का मौका मिला. दिल्ली कैबिनेट ने क्लाउड सीडिंग को मई में मंजूरी दी थी. पांच परीक्षणों के लिए 3.21 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी. जिसमें एक परीक्षण की कीमत 64 लाख रुपये बताई गई. 

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