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महाराष्ट्र में यात्रियों की सुरक्षा पर सख्ती, बसों और टैक्सियों के पैनिक बटन सिस्टम की तत्काल जांच के निर्देश

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने राज्य में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की बसों, कैब और टैक्सियों में लगाए गए पैनिक बटन सिस्टम की प्रभावशीलता को तुरंत सत्यापित किया जाए.

Calendar Last Updated : 13 December 2025, 12:55 PM IST
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महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने राज्य में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की बसों, कैब और टैक्सियों में लगाए गए पैनिक बटन सिस्टम की प्रभावशीलता को तुरंत सत्यापित किया जाए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए इन सिस्टम में किसी भी तरह की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

प्राइवेट टैक्सियों, कैब और बसों में लगे इमरजेंसी बटन के काम न करने की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नीलम गोर्हे ने नागपुर स्थित विधान भवन में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. इस दौरान राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र चल रहा था. बैठक में राज्य परिवहन आयुक्त विवेक भीमणवार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कैब एसोसिएशन के प्रतिनिधि केशव क्षीरसागर मौजूद रहे.

जमीन पर असर उम्मीद के मुताबिक नहीं

बैठक के दौरान उपसभापति ने कहा कि पैनिक बटन सिस्टम का उद्देश्य इमरजेंसी स्थिति में महिलाओं और यात्रियों को तुरंत मदद पहुंचाना था, लेकिन वास्तविकता में इसका असर उम्मीद के अनुरूप नहीं दिख रहा है. उन्होंने माना कि तकनीकी खामियों और जागरूकता की कमी के कारण यह सुरक्षा तंत्र पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पाया है.

नीलम गोर्हे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में प्रतिदिन कम से कम 15 वाहनों की जांच की जाए. उन्होंने कहा कि लाइव ट्रैकिंग डेटा का उपयोग कर यह सुनिश्चित किया जाए कि पैनिक बटन सही तरीके से काम कर रहे हैं. जहां भी खामी मिले, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सहायता में देरी न हो.

जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर

उपसभापति ने यह भी कहा कि सिर्फ सिस्टम लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को इसके इस्तेमाल की जानकारी देना भी जरूरी है. उन्होंने सुझाव दिया कि पैनिक बटन से लैस वाहनों के अंदर स्पष्ट निर्देश चिपकाए जाएं. इसके साथ ही पैम्फलेट, विज्ञापन और विभिन्न मीडिया माध्यमों के जरिए आम नागरिकों में जागरूकता फैलाई जाए. उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप नंबर सक्रिय करने की भी सिफारिश की.

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