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उच्च शिक्षा में बड़ा सुधार, कैबिनेट ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल’ को दी मंज़ूरी

भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. केंद्रीय कैबिनेट ने उस अहम बिल को मंज़ूरी दे दी है, जो यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की जगह लेगा.

Calendar Last Updated : 13 December 2025, 10:03 AM IST
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भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. केंद्रीय कैबिनेट ने उस अहम बिल को मंज़ूरी दे दी है, जो यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की जगह लेगा.

इस प्रस्तावित कानून का नाम पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल था, जिसे अब बदलकर विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल कर दिया गया है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस बिल के ज़रिये एक नया और सशक्त उच्च शिक्षा निकाय स्थापित किया जाएगा, जो देश में उच्च शिक्षा की दिशा और गुणवत्ता तय करेगा.

एक सिंगल रेगुलेटर का प्रस्ताव

नए बिल के तहत विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण को देश का एकमात्र उच्च शिक्षा रेगुलेटर बनाने का प्रस्ताव है. इसका मकसद अलग-अलग संस्थाओं में बंटे रेगुलेटरी ढांचे को एक छत के नीचे लाना है. अभी तक UGC, AICTE और NCTE अलग-अलग क्षेत्रों की देखरेख करते हैं, जिससे नियमों में दोहराव और जटिलता बनी रहती है. सरकार का मानना है कि एक सिंगल रेगुलेटर से नीतियां ज़्यादा साफ़, पारदर्शी और प्रभावी होंगी.

तीन मुख्य ज़िम्मेदारियां तय

प्रस्तावित आयोग को तीन प्रमुख जिम्मेदारियां दी जाएंगी. पहली, रेगुलेशन, यानी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नियम और दिशानिर्देश तय करना. दूसरी, मान्यता (अक्रेडिटेशन), ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को एक समान और विश्वसनीय बनाया जा सके. तीसरी, प्रोफेशनल और अकादमिक स्टैंडर्ड तय करना, जिससे शिक्षा का स्तर वैश्विक मानकों के अनुरूप हो. हालांकि, फंडिंग को अभी इस नए रेगुलेटर के दायरे में लाने का प्रस्ताव नहीं है. फंडिंग से जुड़ा अधिकार संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय के पास ही रहेगा, ताकि संस्थानों को आर्थिक स्तर पर स्वायत्तता मिल सके.

पुराने ड्राफ्ट से मौजूदा बिल तक का सफर

HECI के विचार पर पहले भी चर्चा हो चुकी है. वर्ष 2018 में हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (UGC एक्ट का निरसन) बिल का एक ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया था. इसमें UGC एक्ट को खत्म कर एक नए आयोग की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया था. उस समय इस ड्राफ्ट को स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और फीडबैक लेने के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा गया था. हालांकि, उस वक्त यह बिल कानून का रूप नहीं ले सका. इस दिशा में नए सिरे से प्रयास तब शुरू हुए, जब धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभाला. इसके बाद उच्च शिक्षा सुधारों को लेकर लगातार मंथन हुआ और अब कैबिनेट की मंज़ूरी के साथ यह प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है.

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