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दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद सुरक्षा भंग मामले में दो आरोपियों को दी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए हैं. कुछ लोग इसे नरम रुख मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया. जमानत के बाद भी आरोपियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी.

Calendar Last Updated : 02 July 2025, 12:40 PM IST
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Parliament Security Breach: देश के  लिए 13 दिसंबर 2023 का दिन कभी ना भूलने वाला दिन है. इस दिन संसद के अंदर जब संसद पर हमले की बरसी मनाई जा रही थी, तभी नीलम आजाद और महेश कुमावत नाम के दो लोगों ने एक बार फिर संसद के अंदर हमला कर दिया था. हालांकि यह हमला रंग-बिरंगे गैस का था, लेकिन इतने सुरक्षा के बाद भी इन दोनों का संसद के अंदर इस तरीके से तमाशा करना फिर से देश के लिए एक डरावाना संदेश था. 

दोनों गिरफ्तार आरोपियों को आज दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है. हालांकि जमानती के बदले कुछ शर्ते भी रखी गई है. जिसमें दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके जमा करने का आदेश दिया गया है. साथ ही कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि वे मीडिया को कोई साक्षात्कार नहीं देंगे. साथ ही, इस घटना से जुड़ी कोई सोशल मीडिया पोस्ट भी नहीं करेंगे. 

क्या थी 2023 की संसद सुरक्षा भंग घटना?  

संसद में जब यह घटना घटी तब इस दौरान सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने शून्यकाल के समय लोकसभा की दर्शक दीर्घा से कक्ष में छलांग लगा दी. सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया. लगभग उसी समय संसद परिसर के बाहर भी हंगामा हुआ. दो अन्य आरोपी, अमोल शिंदे और नीलम आज़ाद, ने तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए. इस घटना ने संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. हालांकि बाद में एक्शन लेते हुए चारों आरोपियों को हिरासत में लिया गया. जांच में पता चला कि यह एक सुनियोजित कृत्य था. पुलिस ने इसे संसद की सुरक्षा में गंभीर चूक माना. मामले की जांच गहनता से की गई. आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत भी कार्रवाई हुई. 

कोर्ट का फैसला और प्रतिक्रियाएं  

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए हैं. कुछ लोग इसे नरम रुख मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किया. जमानत के बाद भी आरोपियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे जांच में सहयोग करेंगे और कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं करेंगे. इस घटना ने संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में नहीं होनी चाहिए. सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को लेकर पहले ही अपनी नीतियों की समीक्षा कर चुकी हैं. संसद परिसर में अब सुरक्षा और सख्त की गई है. 

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