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हिमांशी नरवाल के समर्थन में उतरी NCW, पति की हत्या के बाद पत्नी ने की थी सांप्रदायिक सद्भाव की अपील

राष्ट्रीय महिला आयोग ने हिमांशी को ऑनलाइन ट्रोलिंग किए जाने पर ट्रोलर की निंदा की है. आतंकी हमले में पति के मारे जाने के बाद पत्नी ने सांप्रदायिक सद्भाव की अपील की थी. जिसके बाद उनके खिलाफ आलोचनाओं की लहर दौड़ गई थी.

Calendar Last Updated : 05 May 2025, 12:05 PM IST
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Himanshi Narwal: पहलगाम में आतंकियों ने लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की हत्या कर दी थी. हालांकि इसके बाद भी उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल ने मुसलमानों और कश्मीरियों को बदनाम न करने की अपील की थी. उनके इस अपील के बाद उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसके बाद हिमांशी के समर्थन में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) आगे आया है. 

राष्ट्रीय महिला आयोग ने हिमांशी को ऑनलाइन ट्रोलिंग किए जाने पर ट्रोलर की निंदा की है. आतंकी हमले में पति के मारे जाने के बाद पत्नी ने सांप्रदायिक सद्भाव की अपील की थी. जिसके बाद उनके खिलाफ आलोचनाओं की लहर दौड़ गई थी.

एनसीडब्ल्यू ने किया समर्थन 

एनसीडब्ल्यू ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में एनसीडब्ल्यू ने हिमांशी के खिलाफ ऑनलाइन प्रतिक्रिया को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और नागरिकों से सार्वजनिक चर्चा में गरिमा बनाए रखने का आह्वान किया. आयोग ने लिखा कि लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की मौत के बाद जिस तरह से उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल की सोशल मीडिया पर उनके एक बयान के संबंध में आलोचना की जा रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है. यह स्वीकार करते हुए कि राष्ट्रीय पीड़ा के इस क्षण में उनकी टिप्पणी कई लोगों की भावनाओं के अनुरूप नहीं हो सकती है, NCW ने इस बात पर भी जोर दिया कि असहमति को संवैधानिक सीमाओं के भीतर और व्यक्तिगत अधिकारों के सम्मान के साथ व्यक्त किया जाना चाहिए. 

लोगों में आक्रोश का माहौल 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी हमले के दौरान लेफ्टिनेंट नरवाल से उनके धर्म के बारे में पूछे जाने पर उन्हें निशाना बनाया गया और गोली मार दी गई, इस खुलासे ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया. इस बीच हिमांशी की अपील पर नेटिज़न्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. प्रेस को दिए गए एक बयान में, उन्होंने कहा था कि हम नहीं चाहते कि लोग मुसलमानों और कश्मीरियों के पीछे पड़ें. उन्होंने लोगों से देश में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का अनुरोध किया था. जिसके बाद उन्हें ट्रोल होना पड़ा. आयोग की ओर से कहा गया कि किसी महिला को उसकी वैचारिक अभिव्यक्ति या व्यक्तिगत जीवन के आधार पर ट्रोल करना सही नहीं है. उसने सामूहिक दुख के समय में भी हर महिला की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया.

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