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पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच इग्ला-एस मिसाइलों का नया खेप पहुंचा भारत, भारतीय वायुसेना को मिलेगी मजबूती

रूस के साथ किए गए  लगभग 260 करोड़ रुपये के इस सौदे से भारत की हवाई रक्षा क्षमता खासकर पश्चिमी मोर्चे पर और भी ज्यादा मजबूत होगी. भारतीय वायु सेना ने हाल के वर्षों में आपातकालीन और त्वरित खरीद प्रक्रियाओं के जरिए अपने हथियार भंडार को मजबूत किया है. जिसमें सेना द्वारा स्पेयर पार्ट्स और अन्य उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया है.

Calendar Last Updated : 04 May 2025, 02:23 PM IST
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Igla-S missiles: भारतीय सेना ने पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच रूस निर्मित इग्ला-एस मिसाइलों की नई खेप प्राप्त की है. जिससे उसकी रक्षा क्षमता में काफी इजाफा हुआ है.  रूस द्वारा निर्मित इग्ला-एस मिसाइल अत्याधुनिक है, जो की बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियां (VSHORADS) में सेना की हवाई रक्षा रणनीति को मजबूती प्रदान करती हैं.

सरकारी आपातकालीन खरीद नीति के तहत हुए समझौते के माध्यम से ये मिसाइलें प्राप्त की गई हैं. रक्षा सूत्रों के अनुसार कुछ सप्ताह पहले भारतीय सेना को इग्ला-एस मिसाइलों की ताजा आपूर्ति मिली है. इन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को सौंपा जा रहा है ताकि दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोनों से निपटा जा सके.

भारत की बढ़ेगी हवाई रक्षा क्षमता

रूस के साथ किए गए  लगभग 260 करोड़ रुपये के इस सौदे से भारत की हवाई रक्षा क्षमता खासकर पश्चिमी मोर्चे पर और भी ज्यादा मजबूत होगी. भारतीय वायु सेना ने हाल के वर्षों में आपातकालीन और त्वरित खरीद प्रक्रियाओं के जरिए अपने हथियार भंडार को मजबूत किया है. जिसमें सेना द्वारा स्पेयर पार्ट्स और अन्य उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया है. भारतीय सेना द्वारा हाल में इग्ला-एस आपूर्ति के साथ-साथ अतिरिक्त लॉन्चर और 90 VSHORADS मिसाइलों की जरूरत को देखते हुए निविदा जारी की गई है. साथ ही लेजर बीम-राइडिंग VSHORADS का नया संस्करण भी भारतीय सेना में  जल्द शामिल करने की योजना है.

स्वदेशी ड्रोन डिटेक्शन और इंटरडिक्शन सिस्टम

इग्ला-एस की बात करें तो यह 1990 के दशक से उपयोग की जा रही इग्ला मिसाइल का उन्नत रूप है. पुराने संस्करण की मिसाइल को एक भारतीय कंपनी द्वारा नवीनीकृत किया गया है. भारतीय सेना द्वारा यह फैसला पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तानी सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले ड्रोनों के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है. भारत की सेना ने स्वदेशी ड्रोन डिटेक्शन और इंटरडिक्शन सिस्टम मार्क-1 को तैनात किया है. जो 8 किलोमीटर से अधिक दूरी से ड्रोन का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकता है. इस सिस्टम में लेजर तकनीक भी है, जो ड्रोन को जलाकर निष्क्रिय कर सकती है. हाल ही में, जम्मू में सेना ने इस सिस्टम की मदद से एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था.

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