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ओडिशा में छात्रा की आत्मदाह मामले को लेकर हंगामा, विधानसभा के बाहर प्रदर्शन

बालासोर के फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की 20 वर्षीय बी.एड. छात्रा ने 12 जुलाई को कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली थी. वह 90% तक जल गई थी. सोमवार रात भुवनेश्वर के एम्स में उसने दम तोड़ दिया.

Calendar Last Updated : 16 July 2025, 12:07 PM IST
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Odisha Student Death: ओडिशा विधानसभा के बाहर आज भारी हंगामा हुआ. बालासोर की एक कॉलेज छात्रा की आत्मदाह के बाद मौत पर आक्रोशित लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की. पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए पानी और आंसू गैस का उपयोग किया. 

बालासोर के फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की 20 वर्षीय बी.एड. छात्रा ने 12 जुलाई को कॉलेज परिसर में खुद को आग लगा ली थी. वह 90% तक जल गई थी. जिसके बाद इलाज के दौरान सोमवार को पीड़िता का निधन हो गया. छात्रा ने अपने विभागाध्यक्ष समीर कुमार साहू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उसने कॉलेज और पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

पुलिस और सरकार की कार्रवाई  

छात्रा ने 1 जुलाई को कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति को पत्र लिखकर उत्पीड़न की शिकायत की थी. उसने प्राचार्य दिलीप कुमार घोष से भी मुलाकात की. इसके बाद भी कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया. निराशा में उसने आत्मदाह का रास्ता चुना. इस घटना ने कॉलेज प्रशासन और पुलिस की लापरवाही को उजागर किया. एक अन्य छात्रा, जो उसे बचाने की कोशिश में जली, उसका भी इलाज चल रहा है. घटना के बाद पुलिस हरकत में आई. आरोपी प्रोफेसर समीर साहू को शनिवार को गिरफ्तार किया गया. प्राचार्य दिलीप घोष को भी सोमवार को हिरासत में लिया गया. दोनों को निलंबित कर दिया गया है. ओडिशा पुलिस ने मामले की जाँच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पीड़िता के परिवार को 20 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की. साथ आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है.

राजनीतिक उबाल और बंद का ऐलान 

छात्रा की मौत ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया. कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “सिस्टम की हत्या” बताया. बीजद ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया. दोनों दलों ने 17 जुलाई को ओडिशा बंद का आह्वान किया है. भुवनेश्वर में मोमबत्ती रैली और दीपदान सभा का आयोजन हुआ. यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाती है. समाजशास्त्रियों का कहना है कि सामाजिक डर और लज्जा के कारण कई पीड़िताएँ शिकायत करने से बचती हैं. इस मामले ने कॉलेजों में मजबूत शिकायत तंत्र की जरूरत को रेखांकित किया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी पीड़िता के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की.

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