‘सबसे आसान प्रारूप...' मांजरेकर ने फिर अलापा वही राग, कोहली के टेस्ट रिटायमेंट वाले अपने बयान पर अड़े

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर एक बार फिर से चर्चा में हैं. उन्होंने भारत के रनमशीन विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं होता है कि कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर वनडे में खेलना जारी रखा है.

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नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर एक बार फिर से चर्चा में हैं. उन्होंने भारत के रनमशीन विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं होता है कि कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर वनडे में खेलना जारी रखा है, जबकि कोहली टेस्ट क्रिकेट में अपने खेल और तकनीक को सुधार सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि वनडे क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट से अपेक्षाकृत सरल प्रारूप है. 

वनडे में बल्लेबाजी आसान है- मांजरेकर 

मांजरेकर ने इंस्टाग्राम पर बताया कि भारतीय क्रिकेट में पहले से ही यह देखा गया है कि कई खिलाड़ी वनडे में ओपनिंग या नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने के लिए उत्सुक रहते हैं, जबकि वही खिलाड़ी टेस्ट में मध्यक्रम या निचले क्रम में ही खुश रहते हैं. उन्होंने कहा, 'वनडे में ओपनिंग करने या नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने का फायदा यह है कि शुरुआती ओवरों में फील्डिंग कम रहती है और गेंदबाज आपके खिलाफ ज्यादा जोखिम नहीं लेते.”

उन्होंने यह भी बताया कि निचले क्रम में बल्लेबाजी करना वास्तव में कठिन होता है, क्योंकि वहां गेंदबाज आपको आउट करने की पूरी कोशिश करते हैं. उन्होंने एमएस धोनी, युवराज सिंह और सुरेश रैना का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने निचले क्रम से भी वनडे में शानदार प्रदर्शन किया.

शीर्ष तीन की बल्लेबाजी सबसे आसान

मांजरेकर ने निष्कर्ष निकाला कि अगर आप महान बल्लेबाज की तलाश कर रहे हैं, तो वनडे क्रिकेट के नंबर एक, दो और तीन पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी सबसे आसान स्थिति में होते हैं. इसके विपरीत, चौथे, पांचवें और छठे नंबर पर बल्लेबाजी करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है. 

टेस्ट क्रिकेट में बुरे फॉर्म के कारण लिया संन्यास

मांजरेकर का मानना है कि कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में अपने बुरे फॉर्म के कारण इससे संन्यास ले लिया है. संजय का कहना है कि कोहली पिछले साल टेस्ट क्रिकेट में बुरे फॉर्म से गुजर रहे थे. उन्होंने अपनी तकनीकी और फॉर्म में सुधार लाने के बजाय प्रारूप से ही संन्यास ले लिया. जबकि उन्होंने थोड़ समय लेकर अपने तकनीक पर काम करना चाहिए था और कुछ समय बाद टेस्ट प्रारूप में वापसी करनी चाहिए. 

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