नई दिल्ली: उन्नाव बलात्कार केस ने एक नया मोड़ लिया है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हत्या मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है. बता दें पीड़िता के पिता की मौत हिरासत में हो गई थी, इस मामले में पूर्व भाजपा विधायक को दस साल की सजा सुनाई गई थी. अब अदालत ने सेंगर की याचिका खारिज कर दी, जिससे यह साफ हो गया है कि उनको जेल में रहना पड़ेगा.
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि सेंगर को कुल 10 साल की सजा दी गई थी जिसमें से वह करीब 7.5 साल कस्टडी में बिताए चुके हैं और मामले में सजा के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला लेने में देरी हुई है. हालांकि यह देरी कुछ हद तक सेंगर की वजह से हुई, जिन्होंने कई एप्लीकेशन दी थी. इसलिए बेल और सजा सस्पेंड करने की अर्जी खारिज कर दी. अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 3 फरवरी तय की है और कहा कि अपील की सुनवाई जल्द होने पर मामला सुलझ जाएगा.
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— CJI Suryakant Sharma (@Pradeepjat123) January 19, 2026
[Unnao rape case]
Dehi High Court denies bail to Kuldeep Singh Sengar in the case related to the custodial death of Unnao rape victim's father. #UnnaoRapeCase #kuldeepsinghsengar pic.twitter.com/MfTCQMcSEG
बता दें 13 मार्च, 2020 को, हिरासत में पीड़िता के पिता की मृत्यु के मामले में निचली अदालत ने सेंगर को 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी. इसके पहले, सेंगर को 23 दिसंबर, 2025 को नाबालिग बलात्कार मामले में जमानत मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर को इसे रोक दिया. पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि सेंगर जमानत के योग्य नहीं हैं क्योंकि इससे पीड़िता और उसके परिवार को खतरा है.
सेंगर के वकील मनीष वशिष्ठ और कन्हैया सिंघल ने कहा कि अपीलकर्ता पिछले 9 साल से जेल में हैं और अब सिर्फ 11 महीने की सजा शेष है. उन्होंने तर्क दिया कि सेंगर 3 अप्रैल, 2018 को घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे. सेंगर अन्य आरोपियों के साथ 2018 में दोषी ठहराए गए थे और नाबालिग बलात्कार मामले में आजीवन कारावास भी काट रहे हैं.