मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC के चुनावी नतीजों ने मुंबई की सियासत में थ्रिलर फिल्म जैसा मोड़ ला दिया है. बीजेपी भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा इतना करीब है कि एक भी कॉर्पोरेटर का इधर-उधर होना पूरे खेल को पलट सकता है.
सरकार का आंकड़ा बहुमत से सिर्फ 4 सीटें ज्यादा है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कोई रिस्क न लेते हुए अपने सभी 29 कॉर्पोरेटर्स को बांद्रा के एक लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया है. इसे सियासी भाषा में पहरेदारी या रिजॉर्ट पॉलिटिक्स कहा जा रहा है, ताकि विपक्षी दल सेंधमारी न कर सकें.
रिकॉर्ड तोड़ जीत का दावा करने वाली बीजेपी 89 सीटों पर सिमट गई है. पार्टी के अंदरूनी गलियारों में इस प्रदर्शन को लेकर चिंता है. जानकारों का कहना है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के मराठी अस्मिता के मुद्दे का बीजेपी प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाई. साथ ही, टिकट बंटवारे और आपसी तालमेल की कमी ने भी खेल बिगाड़ा.
सत्ता से दूर होने के बावजूद उद्धव ठाकरे के तेवर कम नहीं हुए हैं. उन्होंने एक रहस्यमयी बयान देते हुए कहा, "मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर देखना मेरा सपना है, और अगर भगवान ने चाहा तो यह सच होगा." इस बयान ने शिंदे और बीजेपी खेमे की नींद उड़ा दी है.
227 सीटों वाली BMC में जादुई आंकड़ा 114 है। फिलहाल सत्ताधारी गठबंधन (महायुति) की स्थिति कुछ ऐसी है:
अगर विपक्ष (UBT, कांग्रेस और अन्य) एकजुट होते हैं, तो समीकरण बदल सकते हैं.
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या शिवसेना की शान वापस लाने के नाम पर दोनों गुट फिर करीब आ सकते हैं? पूर्व कांग्रेस नेता संजय झा जैसे विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों गुट सुलह कर लें, तो बीजेपी को आसानी से विपक्ष में बिठाया जा सकता है.