नई दिल्ली: जनवरी 2026 की शुरुआत पश्चिम बंगाल के लिए कुछ खास नहीं रही है. साल के शुरु में ही बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आने आए हैं. जिसके बाद अब ये खतरनाक संक्रमण एक बार फिर से लोगों के ध्यान में आ गया है. ये मामले ICMR की वायरस रिसर्च लैब, एम्स कल्याणी में जांच के दौरान पाए गए.
इसके बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए निगरानी और नियंत्रण के लिए एक संयुक्त विशेषज्ञ टीम राज्य में भेजी है. इस मामले पर सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है, सरकार ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है.
बता दें निपाह वायरस की पहचान पहली बार साल 1998-99 में मलेशिया में हुई थी. उस समय यह बीमारी सुअर पालने वाले लोगों में तेजी से फैली थी और इससे 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. भारत में इसके मामले बहुत ज्यादा नहीं रहे हैं, लेकिन जब भी सामने आए हैं, परिणाम गंभीर रहे हैं.
बता दें भले ही भारत में इसके ज्यादा मामले भारत में नहीं रहे लेकिन जब भी रहे हैं तब इसने पश्चिम बंगाल को जरूर परेशान किया है. इससे पहले साल 2001 और 2007 में पश्चिम बंगाल में इसका प्रकोप दर्ज किया गया था. इसके अलावा केरल में 2018 में निपाह वायरस ने सबसे ज्यादा असर डाला, जहां कई मौतें हुईं. इसके बाद केरल में कुछ छिटपुट मामले सामने आए, जिन्हें समय रहते नियंत्रित कर लिया गया.
अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिरी यह निपाह वायरस है क्या तो बता दें निपाह वायरस एक पशुजनित रोग है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. फल खाने वाले चमगादड़ इसके प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं. ये खुद बीमार नहीं होते, लेकिन उनके संपर्क में आने से वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है.
फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई पक्का इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव और समय पर पहचान सबसे अहम है.
अगर संक्रमण के लक्षण की बात करें तो शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर हो सकता है. इसके शुरुआती लक्षण में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ज्यादा थकान होता है. हालांकि जब मामला गंभीर हो जाता है तो रोगी को चक्कर आना, भ्रम या होश में बदलाव, सांस लेने में दिक्कत और
दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
इस वायरल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है जिसमें उन्होंने कहा कि,