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Batuk Bhairav: अक्सर भगवान शिव की पूजा उनके सबसे शक्तिशाली रूप में की जाती है. कोई उन्हें महाकाल तो कोई महादेव के रूप में पूजा करता है. भगवान शिव की पूजा के दौरान अक्सर दूध, बेलपत्र और भांग चढ़ाया जाता है. लेकिन देश में एक ऐसी भी मंदिर है, जहां लोग महादेव के बालरुप की पूजा करते हैं.
शिवनगरी वाराणसी के एक विशेष मंदिर है जहां उनके बालरुप की पूजा की जाती है और महादेव पर टॉफी, बिस्कुट, नमकीन और चॉकलेट चढ़ाए जाते हैं. लोगों की मान्यता है कि इन चीजों को अर्पित करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.
यह मंदिर शिव की नगरी वाराणसी के कमच्छा क्षेत्र में स्थित बटुक भैरव मंदिर है. काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है और यहां हर गली-मोहल्ले में भगवान शिव के दर्शन होते हैं. बटुक भैरव भगवान शिव के बाल रूप माने जाते हैं. बटुक भैरव की पूजा काशी के इस मंदिर में होती है, और मान्यता है कि भगवान की आयु 5 वर्ष है इसलिए उन्हें बालक के रूप में पूजा जाता है.
काशी के बटुक भैरव मंदिर में भगवान को उसी तरह भोग अर्पित किया जाता है जैसे एक बच्चे को. भक्त यहां बटुक भैरव को टॉफी, चॉकलेट, बिस्कुट, नमकीन और अन्य हल्के स्नैक्स चढ़ाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार का भोग अर्पित करने से भगवान बालक के रूप में भक्त की इच्छाओं को पूर्ण करते हैं. भक्तों का विश्वास है कि भगवान का यह रूप उन्हें उनके कष्टों से मुक्त करता है और हर मनोकामना पूरी करता है.
बटुक भैरव मंदिर में दर्शन करने से न केवल शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं, बल्कि यह भी माना जाता है कि इस मंदिर में आने से राहु-केतु के कष्टों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही जो लोग ऊपरी बाधाओं से परेशान हैं, उनकी भी समस्याएं दूर हो जाती हैं. इस विश्वास से यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
बटुक भैरव मंदिर में पूरे दिन भगवान को बिस्कुट, नमकीन, चॉकलेट और लड्डू जैसे हल्के भोग अर्पित किए जाते हैं., लेकिन शाम को महाआरती के बाद भगवान को भैरव रूप में मटन करी, चिकन करी, मछली करी और आमलेट के साथ मदिरा का भोग भी अर्पित किया जाता है. यह विशेष आयोजन इस मंदिर की विशेषता को और भी अद्वितीय बनाता है.