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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी का दिन विष्णु देव को समर्पित होता है. यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को मनाया जाता है. भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद लेते हैं. यह एकादशी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्यों में उत्साह से मनाई जाती है. इसे पांडव भीम एकादशी भी कहते हैं, क्योंकि यह महाभारत के पांडव भीम से जुड़ी है, जो भोजन के शौकीन थे.
इस बार यह त्योहार 6 जून को मनाई जाएगी. पंचांग के मुताबिक इसका समय सुबह 2:15 बजे शुरू होगी और 7 जून को सुबह लगभग 5 बजे समाप्त होगी. वैष्णव भक्त 7 जून को व्रत रखेंगे. यह उपवास मोक्ष और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
इस शुभ दिन पर भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. घर को गंगाजल से शुद्ध करें और साफ कपड़े पहनें. भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए घर पर या मंदिर में आसन तैयार करें. आसन पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान की मूर्ति स्थापित करें. फूल, पंचामृत, खीर, फल और मेवे चढ़ाएं. विष्णु सहस्रनाम, विष्णु स्तोत्र या गीता का पाठ करें. अंत में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करें. निर्जला एकादशी का नाम पांडवों के भीम के नाम पर पड़ा है. भीम को भोजन बहुत पसंद था, लेकिन उन्होंने इस कठिन उपवास को पूरा किया. ऐसा माना जाता है कि इस उपवास से सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है. यह व्रत आत्मा की शुद्धि और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति को दर्शाता है.
निर्जला एकादशी का उपवास सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता. भक्त इस दिन दान-पुण्य और प्रार्थना में लीन रहते हैं. मान्यता है कि यह व्रत करने से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह भक्तों को आत्मसंयम और आध्यात्मिक अनुशासन सिखाता है. निर्जला एकादशी से पहले भक्तों को हल्का भोजन करना चाहिए. इस दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता जरूरी है. भक्तों को इस दिन क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए.