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सावन महीने की कालाष्टमी आज मनाई जा रही, काल भैरव की पूजा से दूर होंगे भय और संकट, जानें शुभ मुहूर्त

सावन कालाष्टमी आज 5 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है, जिसमें भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन कालाष्टमी पर व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

Calendar Last Updated : 05 August 2026, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी पर व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है. सावन महीने की कालाष्टमी इस बार 5 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है.

सावन कालाष्टमी की तिथि

पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 अगस्त की रात 8:42 बजे शुरू होगी और इसका समापन 6 अगस्त की शाम 6:52 बजे होगा. उदया तिथि और पूजा परंपरा को ध्यान में रखते हुए कालाष्टमी का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा.

कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

काल भैरव की पूजा के लिए रात्रि का समय विशेष माना जाता है. इस दिन निशिता काल में रात 11:30 बजे से 12:30 बजे तक पूजा का शुभ समय बताया गया है. इस दौरान भगवान काल भैरव का ध्यान और पूजा करना शुभ माना जाता है.

कालाष्टमी की पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें.
  • शाम या रात में काल भैरव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
  • भगवान का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें.
  • चंदन, कुमकुम, फूल और काले तिल अर्पित करें.
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • भैरव चालीसा या भैरव स्तोत्र का पाठ करें.
  • जलेबी, इमरती, उड़द और मिठाई का भोग लगाकर आरती करें.

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि काल भैरव की आराधना करने से व्यक्ति को भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है. रात में 'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है. इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा है, क्योंकि कुत्ते को काल भैरव का वाहन माना जाता है.

काल भैरव मंत्र - ॐ कालकालाय विद्महे, तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्॥

नोट: ध्यान दें कि पूजा के मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है. यह लेख धार्मिक मान्यताओं के आधार पर लिखी गई है. जनभावना टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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