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नई दिल्ली: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद पवित्र दिन माना जाता है. इस दिन मंदिरों में सुबह से ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. अगर आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी सरल तरीके से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं.
सावन शिवरात्रि की पूजा के लिए बहुत लंबी प्रक्रिया करना जरूरी नहीं माना जाता. श्रद्धा और साफ मन से किया गया जलाभिषेक भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें. इसके बाद शिवलिंग का जलाभिषेक, पंचामृत से अभिषेक, पूजन सामग्री अर्पित करने के बाद आरती की जा सकती है.
घर पर पूजा करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लें. इसके लिए साफ पानी, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करें. इसके अलावा बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत, धूप और दीपक भी रखें. पूजा की सामग्री पहले से तैयार होने पर अभिषेक के बीच बार-बार उठने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे पूजा शांत मन और बिना किसी परेशानी के पूरी की जा सकती है.
सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. शिवलिंग को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत का संकल्प लें.
पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर साफ पानी और फिर गंगाजल चढ़ाकर करें. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है. पंचामृत चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर दोबारा स्वच्छ जल अर्पित करें.
ब्रह्म मुहूर्त: 05:23 एएम से 06:00 एएम तक
प्रातःकाल शुभ समय: 06:00 एएम से 10:00 एएम तक
अभिजीत मुहूर्त: 12:06 पीएम से 12:58 पीएम तक
प्रदोष काल: 07:04 पीएम से रात 09:00 बजे तक
निशिता काल (मध्यरात्रि): 12:05 एएम से 12:48 एएम तक
अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें. भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र को विशेष महत्व दिया जाता है. इसे चढ़ाते समय शिवजी का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप किया जा सकता है.
पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना आसान और सरल माना जाता है. श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार 108 बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है. अंत में धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.
सावन शिवरात्रि की पूजा में दिखावे से अधिक श्रद्धा और विश्वास को महत्व दिया जाता है. इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार ही पूजा सामग्री की व्यवस्था करें और पूजा के दौरान मन को शांत रखें. पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद ग्रहण करें.
किसी सामग्री या पूजा की विधि को लेकर आपके क्षेत्र में अलग धार्मिक परंपरा या मान्यता है, तो उसका पालन करना उचित माना जाता है. पूजा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण और आराधना करना है.