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हील्स पहनने के कई नुकसान, जानें इससे होने वाली परेशानियों से कैसे करें बचाव

यह लेख ऊंची एड़ी वाले जूतों के स्टाइल के पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिमों पर आधारित है. विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि ये जूते पैरों से लेकर पीठ तक पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. लेख में पांच मुख्य तरीके बताए गए हैं जिनसे ये हानि होती है और हर बिंदु पर सरल उपाय भी सुझाए गए हैं

Calendar Last Updated : 05 November 2025, 03:58 PM IST
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हाई हील्स की ताकत को नकारा नहीं जा सकता, ये कद को लंबा दिखाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाता हैं. किसी भी कपड़े की सुंदरता तुरंत बढ़ा देते हैं. लेकिन इन कुछ इंच की चमक के लिए शरीर को भारी कीमत चुकानी पड़ती है. डॉक्टर और वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि बार बार ऐसे जूते पहनने से मुद्रा खराब हो सकती है. जोड़ों पर दबाव पड़ता है और मांसपेशियां काम करने का तरीका बदल जाती हैं. 

दुनिया भर के अध्ययन इस बात की तस्दीक करते हैं. जर्नल ऑफ फुट एंड एंकल रिसर्च से हार्वर्ड हेल्थ तक के शोध बताते हैं कि ये जूते सिर्फ पैरों को नहीं पूरे शरीर की संरचना को प्रभावित करते हैं. जब फैशन आराम पर हावी हो जाता है तो क्या होता है यह आगे समझाया गया है. 

पैरों के आगे वाले हिस्से पर ज्यादा बोझ

हाई हील्स पहनते समय शरीर का ज्यादातर वजन पैर के आगे वाले भाग पर आता है. पांच सेंटीमीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले जूतों में करीब अस्सी प्रतिशत भार तलवे पर पड़ता है. जर्नल ऑफ फुट एंड एंकल रिसर्च के 2015 के शोध में पाया गया कि लंबे समय तक ऐसे जूते पहनने से आगे का दबाव बढ़ता है.

पैर की प्राकृतिक मेहराब कमजोर हो जाती है. इससे तलवे में दर्द और मॉर्टन न्यूरोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के शोध से पता चला कि रोज तीन घंटे से ज्यादा हील्स पहनने वाली महिलाओं के पैरों में प्राकृतिक कुशन जल्दी खराब हो जाते हैं. ये कुशन हड्डियों की रक्षा करते हैं. उपाय के तौर पर हील्स की ऊंचाई बदलते रहें, नरम जेल पैड इस्तेमाल करें और पैरों को नियमित आराम दें. 

मुद्रा और चलने का तरीका बदलना

ऊंची एड़ी से चलने की शैली पूरी तरह बदल जाती है. कदम छोटे और सख्त हो जाते हैं. पिंडलियों की मांसपेशियों पर ज्यादा जोर पड़ता है. जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजियोलॉजी के 2014 के शोध में यह सामने आया कि ऐसे लोग पुरानी जकड़न का शिकार हो जाते हैं. रोजाना इस्तेमाल के लिए दो इंच से कम ऊंचाई वाले जूते चुनें. बाद में पिंडलियों को खींचने वाले व्यायाम करें. 

घुटनों और कमर पर अतिरिक्त दबाव

ऊंची एड़ी घुटनों पर दबाव चौबीस प्रतिशत तक बढ़ा सकती है. जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक रिसर्च के 1998 के शोध में यह साबित हुआ. इससे कार्टिलेज तेजी से घिसता है, ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है. द स्पाइन जर्नल के 2021 के विश्लेषण में पाया गया कि कमर का वक्र बढ़ जाता है. रीढ़ पर दबाव पड़ता है, निचली पीठ में लंबे समय तक दर्द रहता है. यह बदलाव दिखने में अच्छा लगता है लेकिन शरीर के लिए हानिकारक है. ऐसे जूते पहनने पर पिलेट्स या तैराकी जैसे व्यायाम करें. ये रीढ़ को मजबूत बनाते हैं. 

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