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चीन की भव्य सैन्य परेड, शांति और शक्ति के प्रदर्शन में शी जिनपिंग के साथ पुतिन और किम जोंग उन रहे मौजूद

बीजिंग के तियानमेन चौक पर 3 सितंबर 2025 को चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाई. इस मौके पर एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन हुआ.

Calendar Last Updated : 03 September 2025, 10:51 AM IST
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Chinese Military Parade: बीजिंग के तियानमेन चौक पर 3 सितंबर 2025 को चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाई. इस मौके पर एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन हुआ. यह परेड न केवल युद्ध के बलिदानों की याद दिलाती थी, बल्कि चीन की आधुनिक सैन्य शक्ति और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का भी प्रदर्शन करती थी. हजारों सैनिकों ने चांगआन एवेन्यू पर कदमताल की. यह 2019 के बाद चीन की सबसे बड़ी परेड थी.

परेड से पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शक्तिशाली भाषण दिया. उन्होंने युद्ध के बजाय शांति और टकराव के बजाय संवाद का आह्वान किया. शी ने द्वितीय विश्व युद्ध के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि इतिहास की गलतियों को दोहराने से बचने के लिए युद्ध के कारणों को खत्म करना ज़रूरी है. उनके इस संदेश ने वैश्विक शांति की अपील को रेखांकित किया.

सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन  

परेड में चीन ने अपनी नवीनतम रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया. इसमें उन्नत मिसाइलें, लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक सैन्य उपकरण शामिल थे. कई हथियार पहली बार जनता के सामने आए. सैनिकों ने तोपखाने की सलामी के साथ अनुशासित मार्च किया. यह दृश्य चीन की सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति का प्रतीक था. परेड में 20 से अधिक विदेशी नेता शामिल हुए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन प्रमुख थे. इन नेताओं ने युद्ध के दिग्गजों का सम्मान किया. यह आयोजन ऐतिहासिक विजय और चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव दोनों का प्रतीक था. विदेशी नेताओं की मौजूदगी ने इसकी वैश्विक अहमियत को उजागर किया.

राष्ट्रीय गौरव और रणनीतिक संदेश

यह परेड जापानी आक्रमण के खिलाफ चीन के बलिदानों की याद दिलाती थी. साथ ही, यह देश के सैन्य आधुनिकीकरण और भू-राजनीतिक दृढ़ता को दर्शाती थी. सरकारी मीडिया ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया. परेड ने बीजिंग और क्रेमलिन के संदेशों को मज़बूती दी. यह चीन की वैश्विक मंच पर बढ़ती ताकत का संदेश था. वैश्विक स्तर पर इस परेड पर कड़ी नज़र रही. बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह आयोजन महत्वपूर्ण था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या शी द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका के योगदान को स्वीकार करेंगे. इस टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता को उजागर किया. 

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