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सुप्रीम कोर्ट ने बानू मुश्ताक के उद्घाटन को दी मंजूरी, मैसूर दशहरा विवाद से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट की पीठ शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे. उच्च न्यायालय ने बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले का समर्थन किया था.

Calendar Last Updated : 19 September 2025, 01:52 PM IST
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Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें मैसूर दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया गया था. इस फैसले ने एक बड़े विवाद को हवा दी थी, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. 

सुप्रीम कोर्ट की पीठ शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे. उच्च न्यायालय ने बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले का समर्थन किया था. याचिका दायर करने वाले एच.एस. गौरव सहित अन्य याचिकाकर्ता इस फैसले को पलटना चाहते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील ठुकरा दी. 

कानूनी उल्लंघन को साबित करने में नाकाम

इससे पहले, कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश विभु भाकरू और न्यायमूर्ति सी.एम. जोशी शामिल थे, ने चार जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज कर दिया था. इनमें पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा की याचिका भी शामिल थी. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी संवैधानिक या कानूनी उल्लंघन को साबित करने में नाकाम रहे. पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य धर्म के व्यक्ति द्वारा उद्घाटन करने से कोई कानूनी या संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होता. मैसूर दशहरा, जो कर्नाटक का प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है, 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ समाप्त होगा. इस बार बानू मुश्ताक को उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने का फैसला विवादों में घिर गया. कुछ लोग उनके पुराने बयानों को "हिंदू विरोधी" और "कन्नड़ विरोधी" मानते हैं. खासकर, एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कन्नड़ भाषा को "देवी भुवनेश्वरी" के रूप में पूजने पर आपत्ति जताई थी. 

सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल

बानू मुश्ताक ने अपने बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि उनके पुराने भाषण के कुछ हिस्सों को गलत तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. मुश्ताक का कहना है कि उनके बयानों का गलत अर्थ निकाला गया है. कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता के. शशिकिरण शेट्टी ने अदालत में कहा कि दशहरा उद्घाटन एक राजकीय समारोह है. उन्होंने बताया कि अतिथि चयन के लिए बनी समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल थे. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी बानू मुश्ताक का समर्थन करते हुए कहा कि यह उत्सव सभी समुदायों का 'नाडा हब्बा' है. उन्होंने मुश्ताक को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता के रूप में सम्मानित करने के लिए चुना गया. मैसूर दशहरा का उद्घाटन चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्प वर्षा के साथ होता है. यह उत्सव कर्नाटक की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है. हालांकि, इस बार बानू मुश्ताक का चयन कुछ लोगों को परंपराओं के खिलाफ लगा. 

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