Courtesy: TruthSocial/@realDonaldTrump
ट्रंप ने इससे पहले 18 अगस्त को भी यही तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट की थी. इससे कुछ दिन पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड की एक पुलिस अकादमी में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं. ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज पर अमेरिका का मालिकाना हक जताना वास्तविकता से बहुत दूर है.
होर्मुज को लेकर जारी विवाद के बीच अमेरिका ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी भी कर रहा है. इससे दोनों देशों के बीच पहले से जारी आर्थिक टकराव और गहरा सकता है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करने की उम्मीद है. अमेरिका ने चीन से भी ईरान के तेल निर्यात को रोकने की कोशिशों में सहयोग करने की अपील की है. चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है, इसलिए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर उसके व्यापार पर भी पड़ सकता है.
ईरान ने इन प्रस्तावित प्रतिबंधों का विरोध किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों पर अपनी कानूनी व्यवस्था थोपने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने साफ किया कि इस तरह के दूसरे देशों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है.
मोहसेन रेज़ाई ने क्षेत्र के पड़ोसी देशों को भी अमेरिका के आर्थिक अभियान का हिस्सा नहीं बनने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक युद्ध में शामिल होंगे, उन्हें दुश्मन के रूप में देखा जा सकता है. इस बयान से साफ है कि ईरान केवल अमेरिका के साथ ही नहीं, बल्कि उन देशों के खिलाफ भी सख्त रुख अपना सकता है जो उसके खिलाफ प्रतिबंधों को लागू करने में मदद करेंगे.
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का सबसे अहम केंद्र बन गया है. ईरान का कहना है कि जलमार्ग बंद है और वह अपनी अनुमति के बिना गुजरने वाले तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है. फिलहाल बहुत कम मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजर पा रहे हैं, जबकि बड़े तेल टैंकर और एलएनजी जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है. हालांकि, इराक के अनुरोध के बाद ईरान ने कुछ इराकी तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है.
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने पिछले सात दिनों में होर्मुज के रास्ते रोजाना औसतन करीब 80 लाख बैरल तेल की आवाजाही में मदद की. यह संघर्ष से पहले की रोजाना 2 करोड़ बैरल से अधिक की आवाजाही के मुकाबले काफी कम है.
ईरान के सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने के बावजूद उसके पास मिसाइल और ड्रोन की क्षमता अभी भी मौजूद है. ऐसे में तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित करने की उसकी क्षमता दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. ट्रंप लगातार ईरान को किसी भी तरह की मदद देने वाले देशों को चेतावनी दे रहे हैं और चाहते हैं कि तेहरान अमेरिका की शर्तों के मुताबिक समझौता करे. वहीं ईरान सैन्य दबाव के बीच कूटनीतिक रास्ते की संभावना भी खुली रखना चाहता है.
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की जरूरत पर जोर दिया है. फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बिल्कुल अलग दावे सामने आ रहे हैं. ऐसे में यह समुद्री रास्ता दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव और वैश्विक ऊर्जा संकट का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है.