डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को अमेरिकी अदालत ने बताया अवैध, अब आगे क्या?

फेडरल सर्किट कोर्ट ने पाया कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को आपात स्थिति में कदम उठाने की शक्ति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं. यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. ट्रंप ने व्यापार घाटे और नशीली दवाओं की तस्करी को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर टैरिफ लागू किए थे.

Date Updated
फॉलो करें:
Courtesy: Social Media

Trump Tariff: अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित किया है. इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने कहा कि ट्रंप ने 1970 के दशक के आपातकालीन कानून का दुरुपयोग कर ये टैरिफ लगाए. भारत पर 50% शुल्क, जिसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और 25% रूसी ऊर्जा खरीद का जुर्माना शामिल है, अब खतरे में है.

यह फैसला तुरंत लागू नहीं होगा. अदालत ने 14 अक्टूबर तक कोई बदलाव न करने की समय सीमा दी है. इससे ट्रंप प्रशासन को सर्वोच्च न्यायालय में अपील का मौका मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन इस फैसले को चुनौती देगा. यह फैसला ट्रंप के 10% आधारभूत टैरिफ और जापान, यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और मेक्सिको पर लगाए गए शुल्कों को भी प्रभावित कर सकता है.

कानूनी आधार और विवाद  

फेडरल सर्किट कोर्ट ने पाया कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को आपात स्थिति में कदम उठाने की शक्ति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं. यह अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. ट्रंप ने व्यापार घाटे और नशीली दवाओं की तस्करी को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर टैरिफ लागू किए थे. अदालत ने इसे गैरकानूनी माना. ट्रंप ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की. उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर इसे 'अत्यधिक पक्षपातपूर्ण' बताया और कहा कि यह फैसला अमेरिका को बर्बाद कर देगा. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे 'कूटनीतिक शर्मिंदगी' करार दिया. वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी फैसले के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी. ट्रंप के पास टैरिफ लगाने के लिए 1974 के व्यापार अधिनियम या 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम जैसे वैकल्पिक कानून हैं. लेकिन ये कानून टैरिफ को 15% तक सीमित करते हैं और लागू होने में समय लग सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये रास्ते ट्रंप की मौजूदा नीति को कमजोर करेंगे.

भारत समेत पूरे विश्व पर प्रभाव 

इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर असर पड़ सकता है. नई दिल्ली में 25 अगस्त को होने वाली छठे दौर की वार्ता पहले ही स्थगित हो चुकी है. डेमोक्रेटिक नेता ग्रेगरी मीक्स ने ट्रंप के इस टैरिफ को हटाने की मांग की है. अगर टैरिफ हटते हैं, तो खरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा. थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति और कांग्रेस के अधिकारों के बीच संतुलन की जीत है. उन्होंने बताया कि व्यापार घाटा कोई आपात स्थिति नहीं है. यह फैसला छोटे व्यवसायों और डेमोक्रेटिक राज्यों के गठबंधन की जीत है, जिन्होंने टैरिफ को चुनौती दी थी.

Tags :