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सावन में भारत के बाहर भगवान शिव के इन मंदिरों में करें दर्शन, श्रद्धा और इतिहास का अनोखा संग

भारत के बाहर कई ऐसे मंदिर हैं, जो उनकी महिमा को दर्शाते हैं. आइए, पांच प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में जानें, जिनके दर्शन हर भक्त को जरूर करने चाहिए.  

Calendar Last Updated : 17 July 2025, 03:27 PM IST
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Shiva Temples Outside India: सावन का महीना चल रहा है. इस महीने भगवान शिव की खास पूजा की जाती है. भगवान शिव भारत में ही नहीं, विश्व भर में पूजे जाते हैं. भारत के बाहर कई ऐसे मंदिर हैं, जो उनकी महिमा को दर्शाते हैं. आइए, पांच प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में जानें, जिनके दर्शन हर भक्त को जरूर करने चाहिए.  

पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू, नेपाल  

नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ है. इसे 'पशुओं का स्वामी' कहा जाता है. 753 ईस्वी में जयदेव ने इसे बनवाया था. 17वीं शताब्दी में दीमकों से क्षति के बाद इसका पुनर्निर्माण हुआ. यहां एक मीटर ऊंचा चारमुखी शिवलिंग है. यह मंदिर 275 पाडल पेट्रा स्थलों में शामिल है.  

अरुलमिगु श्री राजा कालिअम्मन मंदिर,  मलेशिया  

1922 में बना यह मंदिर जोहोर बारू का ऐतिहासिक स्थल है. जोहोर के सुल्तान ने भारतीय समुदाय को यह जमीन दी थी. एक छोटी झोपड़ी से शुरू हुआ यह मंदिर अब भव्य है. इसकी खासियत 300,000 रुद्राक्ष मालाओं से सजा गर्भगृह है. कांच का बारीक काम इसे अनोखा बनाता है.  

मुन्नेश्वरम मंदिर, श्रीलंका  

श्रीलंका का मुन्नेश्वरम मंदिर रामायण काल से जुड़ा है. किंवदंती है कि भगवान राम ने रावण को हराने के बाद यहां शिव की पूजा की. परिसर में पांच मंदिर हैं, जिनमें शिव मंदिर सबसे बड़ा है. पुर्तगालियों ने इसे दो बार नष्ट किया, लेकिन जेसुइट्स ने पुनर्निर्माण किया. 

कटासराज मंदिर, चकवाल, पाकिस्तान  

पाकिस्तान के चकवाल में कटासराज मंदिर महाभारत काल से है. कहा जाता है कि पांडवों ने वनवास में यहां शरण ली. पौराणिक कथा के अनुसार, सती की मृत्यु पर शिव के आंसुओं से यहां कुंड बना. परिसर में सात मंदिर हैं. शिव मंदिर एक चौकोर चबूतरे पर बना है, जिसका प्रवेश द्वार गोलाकार मेहराब वाला है.  

प्रम्बानन मंदिर, जावा, इंडोनेशिया  

9वीं शताब्दी में माताराम साम्राज्य के राकाई पिकाटन ने प्रम्बानन मंदिर बनवाया. यह दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है. 'प्रम्बानन' का अर्थ 'सर्वोच्च ब्राह्मण' है. यह ब्रह्मा, विष्णु और शिव को समर्पित है. परिसर में 240 मंदिर थे, जिनमें से कई अब खंडहर हैं. शिव मंदिर यहां की सबसे बड़ी संरचना है.  

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