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भक्ति और उत्साह का संगम है कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार, घर पर ऐसे करें पूजा

जन्माष्टमी पर मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है. भक्त भगवान कृष्ण की मूर्ति को झूले में सजाते हैं. घरों में पूजा-अर्चना होती है. लोग भोग लगाते हैं और प्रसाद बांटते हैं.

Calendar Last Updated : 01 August 2025, 12:39 PM IST
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Krishna Janmashtami 2025: कृष्ण जन्माष्टमी हिंदुओं का पवित्र त्योहार है. यह भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है. इस साल 16 अगस्त को जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी. देश-विदेश में भक्त इस दिन को भक्ति और उत्साह के साथ मनाएंगे.

शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. यह त्योहार धर्म, प्रेम और भक्ति का प्रतीक है. इस दिन मंदिरों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर इस दिन विशेष आयोजन होंगे.

कैसे मनाया जाता है त्योहार?

जन्माष्टमी पर मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है. भक्त भगवान कृष्ण की मूर्ति को झूले में सजाते हैं. घरों में पूजा-अर्चना होती है. लोग भोग लगाते हैं और प्रसाद बांटते हैं. कई जगहों पर कृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियां और नाटक आयोजित होते हैं. जन्माष्टमी की पूजा के लिए कुछ खास चीजों की जरूरत होती है. जैसे की लड्डू गोपाल की मूर्ति को लकड़ी की चौकी और लाल कपड़े पर रखें. अब पूजा की थाली में चंदन, कुमकुम, अक्षत, फूल, पान-सुपारी, मिठाई, फल, दही, मक्खन, मिश्री, गंगा जल, पंचामृत, पंजीरी, बाल कृष्ण के लिए झूला और आभूषण लें लें. इन सामग्रियों से पूजा को भव्य बनाया जा सकता है.

घर पर पूजा करने की विधि

जन्माष्टमी की पूजा सरल और पवित्र होती है. इसके लिए कुछ चरणों का पालन करना होता है. जैसे की सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें. इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. उस पर कृष्ण की मूर्ति रखें. फिर मूर्ति को पंचामृत और स्वच्छ जल से स्नान कराएं. अब भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं. फिर मूर्ति को पालने में रखकर धीरे-धीरे झुलाएं. फिर फूल, मिठाई, फल और भोग चढ़ाएं. अब अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें. यह विधि भक्ति को और गहरा करती है.

जन्माष्टमी केवल पूजा का त्योहार नहीं है. यह भगवान कृष्ण के प्रेम, करुणा और ज्ञान से जुड़ने का अवसर है. उनकी लीलाएं हमें सत्य और धर्म का पाठ पढ़ाती हैं. यह त्योहार परिवार और समुदाय को एकजुट करता है. 16 अगस्त को जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. मंदिरों में सजावट हो रही है. बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानें सजी हैं. भक्त भक्ति भजनों और कीर्तन की तैयारियों में जुटे हैं. घरों में मक्खन और मिश्री के लड्डू बन रहे हैं.

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