शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है और उससे एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक में माहौल गरम रहा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य संसद को सुचारू रूप से चलाने और विपक्ष को विश्वास में लेने का था, लेकिन चर्चा का केंद्र बन गया SIR (Special Intensive Revision) मुद्दा. विपक्षी दलों ने चुनाव सूची संशोधन से जुड़े इस अभियान पर गंभीर सवाल खड़े किए और दावा किया कि SIR के नाम पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है.
बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आश्वासन दिया कि सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और संसद में सार्थक चर्चा का माहौल बनाए रखने की कोशिश करेगी. लेकिन विपक्षी नेताओं ने साफ संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में SIR पर जोरदार हंगामा होना तय है.
‘वोट चोरी नहीं, अब डकैती’—कांग्रेस का सीधा हमला
बैठक से पहले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “यह अब वोट चोरी का मामला नहीं रहा, बल्कि सीधी-सीधी डकैती है. इस मुद्दे को संसद में पूरी ताकत से उठाया जाएगा. साथ ही देश में बढ़ते आतंकवाद और दिल्ली में लगातार हो रहे धमाकों पर भी प्रश्न किए जाएंगे.”
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने बैठक में SIR प्रक्रिया के दुरुपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और सरकार से पूछा कि आखिर चुनाव प्रणाली में इतनी व्यापक छेड़छाड़ क्यों हो रही है. इसके बाद समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने भी इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाया. बैठक का रुख देखकर साफ हो गया कि शीतकालीन सत्र का बड़ा राजनीतिक एजेंडा SIR ही रहने वाला है. जेडीयू के नेता संजय झा ने विपक्ष की चिन्ताओं को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव परिणाम इसका उदाहरण हैं कि SIR का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. झा ने कहा, “पिछले सत्र में भी विपक्ष ने SIR पर हंगामा किया था, पर उन्हें क्या हासिल हुआ? यह पूरी तरह बेवजह का विवाद है."
कौन-कौन थे बैठक में मौजूद?
बैठक में संसद और विभिन्न दलों के कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं—
जेपी नड्डा
किरेन रिजिजू
अर्जुन मेघवाल
एल. मुरुगन
प्रमोद तिवारी
जयराम रमेश
डेरेक ओ’ब्रायन
मनोज झा
राम गोपाल यादव
सुशील गुप्ता
सस्मित पात्रा
अनुप्रिया पटेल
क्या होगा शीतकालीन सत्र का एजेंडा?
सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा. कुल 15 बैठकें होंगी और एटॉमिक एनर्जी बिल सहित 10 नए विधेयक पेश होने की संभावना है. सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर वह सरकार को संसद में घेरने के लिए तैयार है. साफ है कि इस बार संसद का शीतकालीन सत्र गर्म रहने वाला है और SIR इसका सबसे विवादित मुद्दा बन सकता है.