गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी, केंद्र सरकार के नए ड्राफ्ट नियमों में क्या किया बदलाव?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2025 को सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने की शर्तें निर्धारित की गई हैं.

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Courtesy: X (@raghav_chadha)

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2025 को सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने की शर्तें निर्धारित की गई हैं. ये नियम सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुले हैं और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों के लिए महत्वपूर्ण हैं. उल्लेखनीय है कि ये नियम नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स की हड़ताल से ठीक एक दिन पहले जारी हुए, जब वे बेहतर वेतन और कार्य स्थितियों की मांग कर रहे थे.

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को केंद्र द्वारा स्थापित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम निर्धारित दिनों तक काम करना होगा. यदि कोई कामगार एक ही एग्रीगेटर (जैसे स्विगी, जोमैटो या उबर) के साथ जुड़ा है, तो उसे कम से कम 90 दिनों तक काम करना आवश्यक है. वहीं, यदि वह कई एग्रीगेटर्स के साथ कार्य करता है, तो यह अवधि बढ़कर 120 दिन हो जाती है.

क्या कहता है नया नियम?

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि एक कामगार को उस कैलेंडर दिन के लिए कार्यरत माना जाएगा, जब उसने एग्रीगेटर के लिए किए गए काम से कोई भी आय अर्जित की हो, भले ही राशि कितनी भी कम क्यों न हो. यदि कोई कामगार एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के लिए काम करता है, तो इसे तीन दिनों का कार्य गिना जाएगा. कुल दिनों की गणना सभी एग्रीगेटर्स के कार्यों को जोड़कर की जाएगी. ये प्रावधान उन कामगारों पर भी लागू होंगे जो एग्रीगेटर द्वारा सीधे या किसी सब्सिडियरी, होल्डिंग कंपनी, थर्ड पार्टी या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था गिग इकॉनमी की अनियमित प्रकृति को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि वास्तविक कार्य करने वाले लाभार्थी बन सकें.

असंगठित कामगारों के लिए रजिस्ट्रेशन और डिजिटल आईडी

नियमों में असंगठित कामगारों का केंद्र के निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. प्रत्येक पात्र पंजीकृत कामगार को एक डिजिटल पहचान पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें उसकी फोटो और अन्य आवश्यक विवरण शामिल होंगे. श्रम मंत्रालय पहले से ही ई-श्रम पोर्टल पर यह प्रक्रिया चला रहा है, जो असंगठित क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस का कार्य करता है. इस पोर्टल के माध्यम से कामगार अपनी पहचान स्थापित कर सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि, नियमों में चेतावनी दी गई है कि कामगारों को अपनी जानकारी जैसे पता, पेशा, मोबाइल नंबर, कौशल आदि को नियमित रूप से अपडेट करना होगा. यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से अयोग्य हो सकते हैं. यह प्रावधान पारदर्शिता और सटीक डेटा बनाए रखने के उद्देश्य से जोड़ा गया है.

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