देहरादून: किसी को उसकी ईइमानदारी की कितनी बड़ी सजा मिल सकती है यह आप मोहम्मद दीपक के मामले से सीख सकते हैं. दरअसल उत्तराखंड के कोटद्वार में स्थित 'मुहम्मद' दीपक की ईमानदारी के कारण उनके जिम में सदस्यों की संख्या में भारी गिरावट आई, जब एक विवाद में उन्होंने बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा कथित उत्पीड़न से एक मुस्लिम दुकानदार की रक्षा करने के लिए दखल दिया. इस घटना ने विवाद को जन्म दिया. फिर क्या था जिम के बहिष्कार की मांग उठी, जिससे उनके व्यवसाय पर काफी असर पड़ा.
गणतंत्र दिवस के दिन यह घटना घटी, जब कार्यकर्ताओं ने कोटद्वार कस्बे में एक मुस्लिम दर्जी की 30 साल पुरानी कपड़ों की दुकान 'बाबा स्कूल ड्रेस' का नाम बदलने की मांग की. दुकान के बाहर तनाव बढ़ने पर दीपक ने हस्तक्षेप किया. जब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, 'मेरा नाम मोहम्मद दीपक है'.
उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया. इस घटना के बाद हुए विरोध के चलते दीपक के जिम के बहिष्कार की मांग उठी, जिसके चलते सदस्यता में भारी गिरावट आई.
बता दें दीपक किराए की एक बिल्डिंग में अपना जिम चलाते थे. जिसमें कभी 150 सदस्य हुआ करते थे. लेकिन अब वह संख्या घटकर महज 15 रह गई है. इसके बाद दीपक ने कहा कि शहर के आधे लोग मेरा समर्थन करते हैं, लेकिन अच्छे काम करने वाले की लोग सराहना नहीं करते. ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ सकती है. इसका असर मेरी जिम पर पड़ा है.'
कुमार ने आगे कहा कि, 'लोग डरे हुए हैं, और मैं इसे समझता हूं. हालांकि, जिम एक पूरी मंजिल पर चलती है जिसका किराया 40,000 रुपये प्रति माह है. हमारे परिवार में सिर्फ एक ही कमाने वाला है. मैंने हाल ही में घर बनवाया है जिसका अभी भी 16,000 रुपये मंथली लोन जाता है.'
हालांकि ऐसा नही है कि किसी ने भी दीपक का समर्थन नहीं किया. दीपक का समर्थन करने के लिए केरल के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने जिम का दौरा किया और 10,000 रुपये की एक साल की सदस्यता भी ली. उन्होंने दीपक के घर जाकर उन्हें कानूनी और राजनीतिक समर्थन का आश्वासन तक दिया. साथ ही उन्होंने दीपक को विभाजनकारी राजनीति के बीच प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बताया.