नई दिल्ली: प्रयागराज में मौजूदा समय में श्रद्धा का सैलाब आया हुआ है. पूरी संगम धरती प्रयाग में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही है. अब प्रयागराज में गठित सनातनी किन्नर अखाड़ा माघ मेला क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहा है. माघ मेले में पहली बार आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में अखाड़े से जुड़े 11 संतों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया. इनमें से 10 संतों को महामंडलेश्वर और एक संत को महंत की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन पदों में पुरुष, महिला और किन्नर सभी शामिल हैं, जिससे अखाड़े की समावेशी सोच साफ नजर आती है.
पट्टाभिषेक से पहले सभी धार्मिक परंपराओं और नियमों का पालन किया गया, जैसा कि देश के पारंपरिक 13 अखाड़ों में होता है. दीक्षा के दौरान पांच गुरुओं की भूमिका रही. किसी गुरु ने लंगोटी दी, किसी ने कंठी पहनाई, किसी ने चोटी काटी और किसी ने भस्म प्रदान की. इसके बाद सभी संतों ने संगम पर पिंडदान किया और विधि-विधान से गंगा स्नान किया. अंत में आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि (टीना मां) ने गुरु मंत्र देकर दीक्षा पूरी कराई.
महामंडलेश्वर बनाए गए संतों में दिल्ली की पूनम मां, देहरादून के नीतेश शंकर नंद गिरि, कोलकाता की अभिरूपा रंजीता, महाराष्ट्र की उमा पुजारी, ज्योति स्वामी, दिल्ली के पवित्रानंद गिरि, हरिद्वार किन्नर धाम की तारा, पंजाब की सोनम नंद गिरि, श्रीगायत्री और प्रयागराज की संजना कौशल्यानंद गिरि शामिल हैं. वहीं, प्रयागराज की रानी कौशल्यानंद गिरि को महंत बनाया गया है.
इस आयोजन में एक खास बात नजर आई दरअसल कोलकाता की अभिरूपा रंजीता, जोकि देश की पहली किन्नर महिला अधिवक्ता हैं, को भी महामंडलेश्वर बनाया गया. आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि अखाड़े का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना है. आने वाले समय में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारत के लोगों को भी अखाड़े से जोड़ा जाएगा. इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं.
शुक्रवार को किन्नर अखाड़े में एक और दीक्षा समारोह हुआ, जिसमें 7 महामंडलेश्वर, 6 श्रीमहंत, 11 महंत और 21 कंठी चेलों को दीक्षा दी गई. किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सभी को गुरु मंत्र दिया और संदेश दिया कि रील बनाने के बजाय सनातन धर्म के प्रचार पर ध्यान दें. उन्होंने सभी से आने वाले कुम्भ मेलों की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया.