नई दिल्ली: परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर टकराव सामने आ रहा है. अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन ने 2020 में गुपचुप तरीके से परमाणु परीक्षण किए. उनका कहना है कि चीन ने यह सब दुनिया से छिपाने की काशिश की. अब चीन ने अमेरिका के इन दावों का जवाब दिया है. चीन का कहना है कि उसने परमाणु परमाणु मुद्दों पर हमेशा जिम्मेदारी से काम किया है.
ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बची परमाणु हथियार नियंत्रण संधि भी खत्म हो गई है. इसकी समय सीमा 5 फरवरी को खत्म हो गई. जिनेवा में एक निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोप परमाणु हथियार नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच गंभीर तनाव की ओर इशारा करते हैं. इससे पहले बीजिंग ने कहा था कि उसके हथियारों की संख्या काफी कम है, लगभग 600, जबकि मॉस्को और वाशिंगटन दोनों के पास लगभग 4,000 हथियार थे. हालांकि, राजनयिकों ने जिनेवा में वैश्विक सम्मेलन में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आरोपों पर चिंता व्यक्त की.
हथियार नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिकी विदेश उप सचिव, थॉमस डिनानो ने सम्मेलन में कहा, "मैं कह सकता हूं कि अमेरिकी सरकार को पता है कि चीन ने परमाणु विस्फोटक परीक्षण किए हैं, जिसमें सैकड़ों टन की क्षमता वाले परीक्षणों की तैयारी भी शामिल है." उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी सेना ने परमाणु विस्फोटों के आसपास भ्रम पैदा करके परीक्षणों को छिपाने की कोशिश की क्योंकि उसे पता था कि ये परीक्षण परीक्षण प्रतिबंध प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं.
निरस्त्रीकरण के लिए चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा, "चीन ने ध्यान दिया है कि अमेरिका अपने बयान में तथाकथित चीनी परमाणु खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है. चीन ऐसे झूठे बयानों का कड़ा विरोध करता है. हथियारों की होड़ बढ़ाने के लिए अमेरिका जिम्मेदार है."
डिनानो ने सम्मेलन में यह भी कहा कि 2030 तक चीन के पास 1,000 से अधिक परमाणु हथियार होंगे. शेन ने दोहराया कि उनका देश इस स्तर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के साथ नई बातचीत में भाग नहीं लेगा.