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ईरान में नए युग की शुरूआत, खामेनेई की जलती तस्वीरों से सिगरेट जलाती महिलाओं का क्या है संदेश?

ईरान की सड़कें एक बार फिर सुलग रही हैं. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से मौजूदा धार्मिक व्यवस्था के सामने यह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.

Calendar Last Updated : 10 January 2026, 04:09 PM IST
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नई दिल्लीः ईरान की सड़कें एक बार फिर सुलग रही हैं. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से मौजूदा धार्मिक व्यवस्था के सामने यह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य धमकियों और ईरान में इंटरनेट की पूर्ण पाबंदी के बीच, सोशल मीडिया पर कुछ आइकॉनिक विजुअल्स ने दुनिया का ध्यान खींचा है. इनमें ईरानी महिलाएं सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जलती हुई तस्वीरों से बेखौफ होकर सिगरेट जलाती नजर आ रही हैं.

विरोध के पीछे का डबल धमाका

ईरानी कानून के तहत सुप्रीम लीडर का अपमान या उनकी तस्वीर जलाना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. ईरान के कई हिस्सों में महिलाओं के धूम्रपान को सामाजिक रूप से वर्जित या हतोत्साहित किया जाता है. तस्वीर जलाकर सिगरेट जलाना और साथ ही अनिवार्य हिजाब को आग के हवाले करना यह दर्शाता है कि प्रदर्शनकारी अब न केवल राजनीतिक सत्ता, बल्कि दशकों पुराने पितृसत्तात्मक और धार्मिक सामाजिक प्रतिबंधों को भी जड़ से उखाड़ फेंकना चाहते हैं.

महसा अमिनी से शुरू हुई यह लहर अब आंधी है

यह असंतोष की लहर 2022 में महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुई थी. हालांकि शुरुआती विरोध प्रदर्शन बढ़ती महंगाई और खाद्य पदार्थों की कीमतों को लेकर थे, लेकिन अब यह पूरी तरह से शासन विरोधी आंदोलन में बदल चुका है. एमनेस्टी इंटरनेशनल और नेटब्लॉक्स जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि ईरान में इंटरनेट शटडाउन का इस्तेमाल मानवाधिकारों के उल्लंघन और हिंसा को दुनिया से छिपाने के लिए किया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय दबाव और ट्रंप की चेतावनी

तेहरान के अस्पतालों से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश को सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया है. इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान का नेतृत्व "बड़ी मुसीबत" में है और वे सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. दूसरी ओर, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने भी एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों की हत्या की कड़ी निंदा की है.

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