Raksha Bandhan: राखी के धागे ने रोका था बंगाल विभाजन, इसने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया

Raksha Bandhan: भारत में हर छोटे व बड़े त्योहार को धूमधाम से मनाने की परंपरा है. लेकिन जब त्योहार भाई-बहन से जुड़ा हो तो जश्न में चार चांद लग जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर लंबी उम्र की कामना करती हैं. इसके साथ ही भाई भी अपनी बहन […]

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Raksha Bandhan: भारत में हर छोटे व बड़े त्योहार को धूमधाम से मनाने की परंपरा है. लेकिन जब त्योहार भाई-बहन से जुड़ा हो तो जश्न में चार चांद लग जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर लंबी उम्र की कामना करती हैं. इसके साथ ही भाई भी अपनी बहन को वचन देता हैं कि वो जिंदगीभर उसकी रक्षा करेंगा. राखी से जुड़ी कई कहानी है जो मिसाल के रूप में है. जिसमें एक हिंदू-मुस्लिम धार्मिक एकता भी देखने को मिलती है.

राखी ने पैदा की एकजुटता

कई दशक पूर्व जब अंग्रेजों का शासन था तो, उनका भारत पर राज करने का एक ही तरीका हुआ करता था, जिसमें वो कई धर्मों व समुदायों को एक दूसरे के खिलाफ किया करते थे. जिसे डिवाइड एंड रूल बोला जाता है. हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लिए अंग्रेजों ने दुश्मनी पैदा कर दी थी. जिसे आज भी देखा जाता है. लेकिन वहीं राखी के त्योहार ने ऐसा कर दिया था कि ये दवा के रूप में काम आई.

रवींद्रनाथ टैगोर ने निकाला था जुलूस

वर्ष 1905 में गुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों की नीति के विरूद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए जुलूस निकाला. जब अंग्रेज सरकार ने बंगाल के विभाजन के लिए आदेश दिए थे. इस दरमियान सारे समुदायों से गुजारिश की थी वे राजनीति में न फंसे. वहीं जुलूस में सब के हाथ पर राखी बंधे थे. जिसे दूसरे समुदाय के महिलाओं ने बांधा था. छतों से जुलूस पर महिलाएं चावल फेंककर सभी लोगों का अभिनंदन करती थी. टैगोर के इस कदम ने बंगाल में हो रहे विभाजन को रोकने के साथ ही लोगों को एकजुट करने में मदद की. उस दरमियान सड़कों व चौराहों पर हिंदू औरतें अपने मुस्लिम भाइयों को राखी बांध रही थी. आज भी इस दिन को मिसाल मान कर याद किया जाता है.