नई दिल्ली: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इन अटकलों के बीच ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की. मुलाकात कर उन्होंने पार्टी से स्पष्टीकरण मांगा है. कुछ गुप्त सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता संघर्ष को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है और वह अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहते हैं.
अब इसे लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. सिद्धारमैया और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच बार-बार मतभेद की खबरें सामने आई हैं. इतना ही नहीं राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी मंगलवार को राहुल गांधी से मुलाकात की थी.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने और शिवकुमार के बीच मतभेद की खबरों को लगातार खारिज किया है. बता दें मुख्यमंत्री ने कहा है कि उन्हें पार्टी नेतृत्व का पूरा भरोसा है और वे अपना पूरा कार्यकाल निभाएंगे. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद के रोटेशन की किसी भी संभावना से इंकार किया.
पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस में मदभेद की खबरें आ रही हैं लेकिन अब इस पर कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने नेतृत्व में होने वाली किसी भी प्रकार की खींचतान की खबरों को खारिज किया है. साथ ही कहा कि पार्टी के उच्च कमान स्तर पर कोई भी भ्रम की स्थिति नहीं है. खर्गे ने यह भी कहा कि, 'उच्च कमान ने कोई भ्रम पैदा नहीं किया है.'
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी मतभेद की खबरों को मीडिया की अटकलें और विपक्ष के दुष्प्रचार करार दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और वे भाईचारे से काम कर रहे हैं और कांग्रेस के किसी भी नेता से उनका कोई मतभेद नहीं है. शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व उचित समय पर सभी फैसले लेगा और वे उसका पालन करेंगे.
दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच मदभेद का मूल कारण कथित तौर पर आंतरिक समझौता बताया जा रहा है, जिसमें दोनो नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद संभालेंगे.
हालांकि, कांग्रेस ने बार-बार यह साफ किया है कि सिद्धारमैया अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और सत्ता के बंटवारे की कोई योजना नहीं है.