Shani Dev: शनिवार के दिन करें 108 शनिदेव के नामों का जाप, शनि दोष होगा खत्म

Shani Dev: शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए समर्पित है. ऐसा कहा जाता है कि जो लोग शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और उसके 108 नामों का जाप करते हैं.

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हाइलाइट्स

  • शास्त्रों में शनिदेव की पूजा को बहुत चमत्कारी माना गया है
  • शनिदेव के 108 नामों का जाप करने से शनि दोष समाप्त हो जाता है।

Shani Dev: शास्त्रों में शनिदेव की पूजा को बहुत चमत्कारी माना गया है. शनिवार के दिन शनि की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि जो भक्त शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और उसके 108 नामों का जाप करते हैं. उनका कल्याण होने से कोई नहीं रोक सकता. इसके अलावा कुंडली से शनि दोष भी खत्म हो जाता है. 

शनिदेव के 108 नाम जिनके जाप से होगा शनि दोष ख़त्म

ऊँ शान्ताय नमः
ऊँ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः
ऊँ शरण्याय नमः
ऊँ वरेण्याय नमः
ऊँ सर्वेशाय नमः
ऊँ सौम्याय नमः
ऊँ सुरवन्द्याय नमः
ऊँ सुरलोकविहारिणे नमः
ऊँ सुखासनोपविष्टाय नमः
ऊँ सुन्दराय नमः
ऊँ घनाय नमः
ऊँ घनरूपाय नमः
ऊँ घनाभरणधारिणे नमः
ऊँ घनसारविलेपाय नमः
ऊँ खद्योताय नमः
ऊँ मन्दाय नमः
ऊँ मन्दचेष्टाय नमः
ऊँ महनीयगुणात्मने नमः
ऊँ मर्त्यपावनपदाय नमः
ऊँ महेशाय नमः
ऊँ छायापुत्राय नमः
ऊँ शर्वाय नमः
ऊँ शततूणीरधारिणे नमः
ऊँ चरस्थिरस्वभा वाय नमः
ऊँ अचञ्चलाय नमः
ऊँ नीलवर्णाय नम:
ऊँ नित्याय नमः
ऊँ नीलाञ्जननिभाय नमः
ऊँ नीलाम्बरविभूशणाय नमः
ऊँ निश्चलाय नमः
ऊँ वेद्याय नमः
ऊँ विधिरूपाय नमः
ऊँ विरोधाधारभूमये नमः
ऊँ भेदास्पदस्वभावाय नमः
ऊँ वज्रदेहाय नमः
ऊँ वैराग्यदाय नमः
ऊँ वीराय नमः
ऊँ वीतरोगभयाय नमः
ऊँ विपत्परम्परेशाय नमः
ऊँ विश्ववन्द्याय नमः
ऊँ गृध्नवाहाय नमः
ऊँ गूढाय नमः
ऊँ कूर्माङ्गाय नमः
ऊँ कुरूपिणे नमः
ऊँ कुत्सिताय नमः
ऊँ गुणाढ्याय नमः
ऊँ गोचराय नमः
ऊँ अविद्यामूलनाशाय नमः
ऊँ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः
ऊँ आयुष्यकारणाय नमः
ऊँ आपदुद्धर्त्रे नमः
ऊँ विष्णुभक्ताय नमः
ऊँ वशिने नमः
ऊँ विविधागमवेदिने नमः
ऊँ विधिस्तुत्याय नमः
ऊँ वन्द्याय नमः
ऊँ विरूपाक्षाय नमः
ऊँ वरिष्ठाय नमः
ऊँ गरिष्ठाय नमः
ऊँ वज्राङ्कुशधराय नमः
ऊँ वरदाभयहस्ताय नमः
ऊँ वामनाय नमः
ऊँ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः
ऊँ श्रेष्ठाय नमः
ऊँ मितभाषिणे नमः
ऊँ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः
ऊँ पुष्टिदाय नमः
ऊँ स्तुत्याय नमः
ऊँ स्तोत्रगम्याय नमः
ऊँ भक्तिवश्याय नमः
ऊँ भानवे नमः
ऊँ भानुपुत्राय नमः
ऊँ भव्याय नमः
ऊँ पावनाय नमः
ऊँ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः
ऊँ धनदाय नमः
ऊँ धनुष्मते नमः
ऊँ तनुप्रकाशदेहाय नमः
ऊँ तामसाय नमः
ऊँ अशेषजनवन्द्याय नमः
ऊँ विशेशफलदायिने नमः
ऊँ वशीकृतजनेशाय नमः
ऊँ पशूनां पतये नमः
ऊँ खेचराय नमः
ऊँ खगेशाय नमः
ऊँ घननीलाम्बराय नमः
ऊँ काठिन्यमानसाय नमः
ऊँ आर्यगणस्तुत्याय नमः
ऊँ नीलच्छत्राय नमः
ऊँ नित्याय नमः
ऊँ निर्गुणाय नमः
ऊँ गुणात्मने नमः
ऊँ निरामयाय नमः
ऊँ निन्द्याय नमः
ऊँ वन्दनीयाय नमः
ऊँ धीराय नमः
ऊँ दिव्यदेहाय नमः
ऊँ दीनार्तिहरणाय नमः
ऊँ दैन्यनाशकराय नमः
ऊँ आर्यजनगण्याय नमः
ऊँ क्रूराय नमः
ऊँ क्रूरचेष्टाय नमः
ऊँ कामक्रोधकराय नमः
ऊँ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः
ऊँ परिपोषितभक्ताय नमः
ऊँ परभीतिहराय नमः
ऊँ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः

शनि देव के 108 नाम ये रहे

  1. घन
    सौम्य
    शरण्य
    सर्वाभीष्टप्रदायिन्
    सुरवन्द्य
    शनैश्चर
    सुरलोकविहारिण्
    सुखासनोपविष्ट
    सुंदर
    शांत
    घनरूप
    घनाभरणधारिण्
    घनसारविलेप
    खद्योत
    मन्द
    वरेण्य
    सर्वेश
    मन्दचेष्ट
    महनीयगुणात्मन्
    मर्त्यपावनपद
    महेश
    छायापुत्र
    शर्व
    शततूणीरधारिण्
    चरस्थिरस्वभाव
    अचञ्चल
    नीलवर्ण
    नित्य
    नीलाञ्जननिभ
    नीलाम्बरविभूशण
    निश्चल
    वेद्य
    विधिरूप
    विरोधाधारभूमी
    भेदास्पदस्वभाव
    वज्रदेह
    वैराग्यद
    वीर
    वीतरोगभय
    विपत्परम्परेश
    विश्ववन्द्य
    गृध्नवाह
    गूढ
    कूर्माङ्ग
    कुरूपिण्
    कुत्सित
    गुणाढ्य
    गोचर
    आयुष्यकारण
    आपदुद्धर्त्र
    विष्णुभक्त
    वशिन्
    अविद्यामूलनाश
    विद्याविद्यास्वरूपिण्
    विविधागमवेदिन्
    विधिस्तुत्य
    वन्द्य
    विरूपाक्ष
    वरिष्ठ
    गरिष्ठ
    वज्राङ्कुशधर
    वरदाभयहस्त
    वामन
    ज्येष्ठापत्नीसमेत
    श्रेष्ठ
    मितभाषिण्
    कष्टौघनाशकर्त्र
    पुष्टिद
    स्तुत्य
    स्तोत्रगम्य
    भक्तिवश्य
    अशेषजनवन्द्य
    विशेषफलदायिन्
    भानु
    भानुपुत्र
    भव्य
    पावन
    धनुर्मण्डलसंस्था
    धनदा
    धनुष्मत्
    तनुप्रकाशदेह
    तामस
    वशीकृतजनेश
    पशूनां पति
    खेचर
    घननीलाम्बर
    काठिन्यमानस
    आर्यगणस्तुत्य
    नीलच्छत्र
    नित्य
    निर्गुण
    गुणात्मन्
    निन्द्य
    वन्दनीय
    धीर
    दिव्यदेह
    दीनार्तिहरण
    क्रूर
    क्रूरचेष्ट
    दैन्यनाशकराय
    आर्यजनगण्य
    कामक्रोधकर
    कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारण
    परिपोषितभक्त
    परभीतिहर
    भक्तसंघमनोऽभीष्टफलद
    निरामय
    शनि