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पश्चिम बंगाल में बीच सड़क पर महिला से बर्बरता, आरोपी हुआ गिरफ्तार

West Bengal: पश्चिम बंगाल के चोपड़ा ब्लॉक में बीच सड़क पर एक महिला को डंडे से पीटने वाले व्यक्ति को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. वही चोपड़ा के विधायक हमीदुल रहमान ने कहा कि महिला की गतिविधियां "असामाजिक" थी.

Calendar Last Updated : 01 July 2024, 09:42 AM IST
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West Bengal: पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े पर क्रूर हमले का वीडियो वायरल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है. इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि बांस की छड़ियों से महिला को पीटता हुए दिखाई देने वाले शख्स की पहचान ताजमुल उर्फ ​​“जेसीबी” के रूप में की गई है – जो कथित तौर पर उत्तर दिनाजपुर जिले का एक स्थानीय टीएमसी नेता है. मिली जानकारी के अनुसार यह घटना कंगारू कोर्ट के फैसले के बाद हुई.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने रविवार को मामला दर्ज कर तजमुल को गिरफ्तार कर लिया, वही चोपड़ा विधायक हमीदुल रहमान ने कहा कि महिला की गतिविधियां "असामाजिक" थीं. जबकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि टीएमसी का तजमुल से कोई संबंध है. विधायक हमीदुल रहमान ने कहा कि यह गांव का मामला है और इसका टीमसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. 

मामले की जांच की जाएगी

तृणमूल विधायक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हम इस घटना की निंदा करते है. जबकि महिला ने भी गलत किया. महिला ने अपने पति, बेटे और बेटी को छोड़ दिया और एक दुष्ट जानवर बन गई. हम इस बात से सहमत हैं कि जो हुआ वह अतिवादी था. अब इस मामले में जो भी कानूनी कार्रवाई होगी वह की जाएगी. वही बीजेपी, कांग्रेस और माकपा ने इस घटना के लिए ममता बनर्जी सरकार की आलोचना की, वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी.

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार ने कहा कि टीएमसी के हमीदुल रहमान का "मुस्लिम राष्ट्र" का उल्लेख करना और 'कुछ नियमों' के तहत दंड की बात करना बेहद ही चिंताजनक है. सुकांत मजूमदार ने अपने एक्स पर लिखा, क्या टीएमसी पश्चिम बंगाल को ऐसा राज्य घोषित कर रही है जहां शरिया कानून लागू होगा?

 पुष्टि के बाद मामला दर्ज 

इस्लामपुर पुलिस ने एक बयान में कहा, "इस्लामपुर पुलिस थाने के अंतर्गत चोपड़ा थाने में हुई एक घटना के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए कुछ लोगों द्वारा प्रयास किए जा रहे है. जबकि सच्चाई यह है कि पुलिस ने तुरंत व्यक्ति की पहचान करके उसे गिरफ्तार कर लिया है, जिसने सार्वजनिक रूप से एक महिला को पीटा था. बयान में कहा गया है कि पीड़ित दंपत्ति को पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई है. इस्लामपुर के पुलिस अधीक्षक जोबी थॉमस ने रविवार को कहा कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो देखी और इसकी पुष्टि के बाद मामला दर्ज किया. 

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में वीडियो साझा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन का घिनौना चेहरा है. इस वीडियो में जो व्यक्ति महिला को बेरहमी से पीट रहा है. वह अपनी 'इंसाफ' सभा के माध्यम से त्वरित न्याय देने के लिए प्रसिद्ध है और चोपड़ा विधायक हमीदुर रहमान का करीबी सहयोगी है. 


शोषण और जमीन हड़पने के आरोप

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के हर गांव में एक संदेशखाली है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी "महिलाओं के लिए अभिशाप" है. अमित मालवीय ने पोस्ट में कहा, "बंगाल में कानून और व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है. क्या सीएम ममता बनर्जी इस राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करेंगी या उसका बचाव करेंगी, जैसे वह शेख शाहजहां के लिए खड़ी हुई थीं? शेख शाहजहां उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखली का एक गिरफ्तार टीएमसी पदाधिकारी है, जहां तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ यौन शोषण और जमीन हड़पने के आरोप लगाए गए है. 


पश्चिम बंगाल का नाम खराब

बाद में एक पोस्ट में मोहम्मद सलीम ने एक वीडियो साझा किया जिसमें पुलिसकर्मी आरोपियों के साथ इस्लामपुर पुलिस स्टेशन में प्रवेश करते नजर आ रहे हैं उन्होंने दावा किया, "हमेशा की तरह, संतरी गार्ड सलामी देने वाला था! वही अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में आम लोगों और टीएमसी के राजनीतिक विरोधियों पर हमले जारी है.जबकि तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में लोकसभा चुनाव जीता है. उन्होंने कहा, किसी महिला को इस तरह से कैसे पीटा जा सकता है? किसी महिला पर हमला बर्बरता निंदनीय है. अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हिंसा की ऐसी घटनाएं पश्चिम बंगाल का नाम खराब कर रही है.

 घटना की निंदा की

इसी बीच, टीएमसी जिला अध्यक्ष कन्यालाल अग्रवाल ने इस घटना के लिए दंपत्ति के कथित अवैध संबंध को जिम्मेदार ठहराया, जो "ग्रामीणों को पसंद नहीं आया" कन्यालाल अग्रवाल ने कहा कि पार्टी इस प्रकरण की जांच करेगी. टीएमसी के प्रवक्ता शांतनु सेन ने घटना की निंदा की, लेकिन यह भी बताया कि वाम मोर्चा शासन के दौरान भी इस तरह की कंगारू अदालतें आम थीं.

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