कैलाश मानसरोवर यात्रा से लेकर सीमा समझौते तक, पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात की खास बात

प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद थे. यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

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Courtesy: Social Media

India-China Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से पहले एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की.  प्रधानमंत्री मोदी की 7 साल बाद पहली चीन यात्रा थी. 2018 के बाद यह उनकी शी जिनपिंग के साथ पहली द्विपक्षीय मुलाकात थी. इस बैठक ने भारत-चीन संबंधों में नई उम्मीद जगाई है.

लद्दाख में 2020 के गतिरोध के बाद भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा था. इस बैठक ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी. प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद थे. यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

चीन की सफल अध्यक्षता की सराहना

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में शी जिनपिंग का आभार जताया. उन्होंने एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण और चीन की सफल अध्यक्षता की सराहना की. मोदी ने कहा कि यह मंच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है. बैठक में सीमा प्रबंधन पर एक अहम समझौता हुआ. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर सहमति बनाई है. इससे सीमा पर शांति और स्थिरता का माहौल बनेगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए सकारात्मक है.

प्रधानमंत्री ने 2024 की कज़ान बैठक का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस बैठक ने संबंधों को सकारात्मक दिशा दी थी. प्रमुख टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी ने सीमा पर स्थिति को बेहतर किया है. यह दोनों देशों के लिए राहत की बात है. तनाव कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. कैलाश मानसरोवर फिर से शुरू कर दिया गया है. अब भारतीय तीर्थयात्री तिब्बत की पवित्र यात्रा कर सकेंगे. यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाएगा.

भविष्य के लिए रोडमैप का सुझाव

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं फिर शुरू हो रही हैं. यह कदम लोगों के बीच संपर्क को सामान्य बनाएगा. इससे व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत और चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों का कल्याण जुड़ा है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए जरूरी है. यह पूरी मानवता के लिए लाभकारी होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पारस्परिक विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्ते मजबूत करना चाहता है. उन्होंने भविष्य के लिए एक रोडमैप का सुझाव दिया. यह रिश्तों को और गहरा करने में मदद करेगा. यह बैठक 1 सितंबर को होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले हुई. इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन सहित 20 से अधिक नेता शामिल हुए. यह मंच क्षेत्रीय सहयोग के लिए अहम है. यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीद पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. वहीं, चीन को इससे छूट मिली है. इसने भारत-चीन सहयोग को और महत्वपूर्ण बना दिया है.

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