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शुभमन गिल के लिए मुश्किल होगा 2026, T20 टीम से बाहर होने के बाद क्या कप्तान कर पाएंगे दमदार वापसी?

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे और वर्तमान टेस्ट व वनडे कप्तान शुभमन गिल के लिए साल 2026 किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होने वाला है.

Calendar Last Updated : 06 January 2026, 10:16 PM IST
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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे और वर्तमान टेस्ट व वनडे कप्तान शुभमन गिल के लिए साल 2026 किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होने वाला है. एक तरफ जहां उन्होंने 2025 का अंत दुनिया में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में किया, वहीं दूसरी ओर 2026 की शुरुआत उनके लिए झटकों भरी रही है. खराब फॉर्म और चोट के कारण बीसीसीआई ने उन्हें घरेलू T20 वर्ल्ड कप की टीम से बाहर कर दिया है, जिससे उनके छोटे फॉर्मेट के करियर पर सवालिया निशान लग गए हैं.

2025 का शिखर और 2026 की ढलान

साल 2025 के दूसरे हाफ तक गिल सफलता के रथ पर सवार थे. उन्हें भारत की टेस्ट और वनडे टीम की कमान सौंपी गई थी. उनकी कप्तानी में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जैसे बड़े खिताब जीते, लेकिन साल के अंत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में मिली हार और गिल की अपनी चोट ने समीकरण बदल दिए. अब चुनौती यह है कि 2026 में उनके पास खुद को साबित करने के लिए मैचों की संख्या बहुत कम है.

सीमित मौके और स्ट्राइक रेट का दबाव

इस साल भारत को बहुत कम वनडे और टेस्ट मैच खेलने हैं. तय कार्यक्रम के अनुसार, केवल छह वनडे सीरीज और महज चार टेस्ट मैच ही होने हैं. ऐसे में गिल पर दबाव होगा कि वह हर पारी को बड़े स्कोर में बदलें. खासकर आलोचक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह बड़ी टीमों के खिलाफ भी वैसा ही प्रदर्शन कर पाएंगे जैसा उन्होंने द्विपक्षीय सीरीज में किया है.

भविष्य की राह आसान नहीं

2026 वह साल है जब गिल को यह साबित करना होगा कि वह विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों की विरासत संभालने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं. जुलाई में इंग्लैंड का दौरा और साल के अंत में न्यूजीलैंड दौरा उनके टेस्ट कप्तानी की असली परीक्षा लेगा.

2027 का वनडे वर्ल्ड कप लक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि गिल को 2025 के रिकॉर्ड्स को दोहराने के बजाय छोटे-छोटे सुधारों पर ध्यान देना चाहिए. उनका असली लक्ष्य 2027 का वनडे वर्ल्ड कप और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज होनी चाहिए. फिलहाल, भारतीय कप्तान के लिए यह साल 'करो या मरो' जैसी स्थिति लेकर आया है.

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