नई दिल्ली: हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पर खेला गया अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल अंडर- 19 क्रिकेट का धमाकेदार मैच रहा. इस मैच को सदियों तक याद किया जाएगा. मैच में वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारी की गूंज अब तक नहीं थमी है.
इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन ठोकने वाले 14 वर्षीय बल्लेबाज वैभव ने न सिर्फ भारत को ट्रॉफी जिताई, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों को अपने प्रदर्शन से हैरानी में भी डाल दिया है. लेकिन ऐसे प्रदर्शन के बाद सूर्यवंशी का सीनियर टीम इंडिया से बाहर होना सबके लिए एक पहेली बना हुआ है.
फरवरी 2026 में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने अपने बल्ले का लोहा मनवा लिया है. उन्होंने अपनी पारि के दौरान 15 छक्कों की मदद से ऐसा तूफान खड़ा किया, जिसने मैच का रुख ही बदल दिया.
उन्होंने फाइनल मुकाबले में महज 80 गेंदों में 218.75 की स्ट्राइक रेट से 175 रनों की आतिशी पारी खेली. यह पारी किसी एक मैच की कहानी नहीं थी, बल्कि आने वाले समय की झलक थी. इसके बावजूद सीनियर टीम का दरवाज़ा अभी उनके लिए बंद है.
दरअसल, भारतीय सीनियर टीम और वैभव सूर्यवंशी के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट कोई और नहीं बल्कि आईसीसी का नियम एक है. 2020 से लागू नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए किसी भी खिलाड़ी की उम्र कम से कम 15 साल होनी चाहिए और वैभव फिलहाल 14 वर्ष के ही हैं. बता दें उनका जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ है. इसी वजह से चयनकर्ता चाहकर भी उन्हें सीनियर टीम में शामिल नहीं कर सकते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि वैभव अब अंडर-19 टीम के लिए भी दोबारा नहीं खेल पाएंगे. बीसीसीआई के 'वन टूर्नामेंट' नियम के तहत कोई भी खिलाड़ी एक ही अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल सकता है. 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद, उनके लिए अंडर- 19 विश्व कप का दरवाज़ा भी बंद हो चुका है.
पिछले 12 महीनों में वैभव ने रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है. जब से वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा है तब से वह नए-नए रिकॉर्ड बनाते ही जा रहे हैं. आईपीएल 2025 से सबकी निगाहों में आए सूर्यवंशी की काबीलियत अब किसी से छुपी नहीं है.
फिलहाल सूर्यवंशी का तूफान घरेलू और फ्रेंचाइज़ क्रिकेट तक ही सीमित है. लेकिन जैसे ही वह 27 मार्च 2026 को 15 साल के होंगे, भारतीय सेलेक्टर्स उन्हें सीनियर टीम में एंट्री दे सकते हैं.