मुंबई: ठाकरे परिवार ने 25 साल बाद नगर निगम (बीएमसी) पर अपना नियंत्रण खो दिया है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मराठी पहचान और अधिकारों की राजनीति को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया है. शिवसेना ने चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.'
बालासाहेब ठाकरे को मराठी लोगों के हितों के लिए आवाज उठाने वाला बड़ा नेता माना जाता है, और उसी विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात अब उनके परिवार ने दोहराई है.
बीएमसी चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर बड़ी जीत हासिल की है. इस जीत के साथ ही ठाकरे परिवार का 25 साल पुराना शासन खत्म हो गया. भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा है.
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 वार्ड जीत दर्ज की. वहीं भाजपा ने 89 वार्ड जीते हैं. बता दें बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निगम है, जिसका सालाना बजट 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक है.
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 227 में से 65 वार्ड मिले. पार्टी ने कहा कि वह मराठी लोगों के सम्मान के लिए संघर्ष करती रहेगी. पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई तब तक चलेगी, जब तक मराठियों को उनका हक और सम्मान नहीं मिल जाता.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने भी हार के बाद साफ कहा कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. उनकी पार्टी को इस चुनाव में सिर्फ 6 सीटें मिलीं, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखने की बात कही. राज ठाकरे ने कहा कि, 'अगर मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी गलत हुआ, तो हमारे पार्षद सत्ता में बैठे लोगों को जवाब देंगे.' उन्होंने आगे कहा कि उनका संघर्ष मराठी भाषा, मराठी पहचान और महाराष्ट्र के लिए है और यह संघर्ष लंबा चलेगा.
राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग मराठी लोगों को परेशान करते हैं और उनका शोषण करते हैं. उन्होंने कहा कि चाहे मुंबई हो या पूरा महाराष्ट्र, मराठी जनता को एकजुट रहना होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि एमएनएस चुनाव में हुई गलतियों की समीक्षा करेगी और पार्टी को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीएमसी चुनाव कई सालों की देरी के बाद हुए हैं. कुल 227 सीटों के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे.