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शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, एक्सिओम 4 मिशन के साथ ISS पर पहुंचे

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया. एक्सिओम 4 मिशन बुधवार को दोपहर 12:01 बजे (IST) लॉन्च हुआ. 28 घंटे की यात्रा के बाद ड्रैगन कैप्सूल गुरुवार को शाम 3:18 बजे ISS से जुड़ा. चार सदस्यीय दल 14 दिन तक ISS पर रहेगा. वे माइक्रोग्रैविटी में 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. 

Calendar Last Updated : 26 June 2025, 04:25 PM IST
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Axiom 4 Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एक एक बार फिर हर भातीयों को गर्व महसूस कराया है. उन्होंने वह कर दिखाया, जिसे कोई भी नहीं मिटा सकता है. एक्सिओम 4 मिशन के तहत वह गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुँचे. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट और स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल के साथ मिशन शुरू हुआ. 

एक्सिओम 4 मिशन बुधवार को दोपहर 12:01 बजे लॉन्च हुआ. जिसके बाद लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद ड्रैगन कैप्सूल आज शाम लगभग 3 बजकर 18 मिनट पर जुड़ा. चार सदस्यीय दल 14 दिन तक ISS पर रहेगा. वे माइक्रोग्रैविटी में 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. 

शुभांशु शुक्ला का संदेश

शुक्ला ने अंतरिक्ष से कहा कि माइक्रोग्रैविटी में रहना बच्चे की तरह फिर से जीना सीखने जैसा है. उन्होंने वैक्यूम में तैरने को अद्भुत बताया. लॉन्च से पहले 30 दिन के क्वारंटीन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मैं बस यही चाहता था कि हमें जाने दिया जाए. शुक्ला ने राकेश शर्मा को अपना प्रेरणास्रोत बताया. मिशन को लीड पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन कर रही हैं. उनके साथ शुभांशु शुक्ला (भारत), स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्निएव्स्की (पोलैंड) और टिबोर कापू (हंगरी) हैं. व्हिटसन ने अंतरिक्ष में 675 दिन बिताकर रिकॉर्ड बनाया है. 

भारत की अंतरिक्ष में वापसी

41 साल बाद भारत ने अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजा. 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत सैल्यूट-7 स्टेशन की यात्रा की थी. शुक्ला पहले भारतीय हैं जो ISS पर पहुंचे. भारत, पोलैंड और हंगरी ने चार दशक बाद अंतरिक्ष में वापसी की. अब लगभग 70 प्रयोग किए जाएंगे. भारत के सात प्रयोग शामिल हैं. इनमें माइक्रोग्रैविटी में फसल उगाने, मांसपेशियों की हानि और सूक्ष्मजीवों के व्यवहार का अध्ययन शामिल है. ये प्रयोग भारत के गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्पेसएक्स की यह 18वीं मानव अंतरिक्ष उड़ान है. फाल्कन 9 रॉकेट और ड्रैगन कैप्सूल ने मिशन को सफल बनाया. नासा और एक्सिओम स्पेस की साझेदारी ने इसे संभव किया. एक्सिओम स्पेस भविष्य में वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बनाना चाहता है. 

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