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ISS से 18 दिनों बाद पृथ्वी पर वापस लौटे शुभांशु शुक्ला, एक्सिओम-4 अंतरिक्ष यान की हुई सफल लैंडिंग

शुक्ला अपने तीनों साथी के साथ सोमवार सुबह 3:30 बजे (IST दोपहर 2 बजे) ड्रैगन अंतरिक्ष यान ग्रेस में सवार हुए. 18 दिन ISS पर बिताने के बाद, चालक दल 22.5 घंटे की यात्रा कर के पृथ्वी पर वापस लौट गए हैं.

Calendar Last Updated : 15 July 2025, 04:12 PM IST
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Ax-4 Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मंगलवार अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से आज पृथ्वी पर वापस लौट गए हैं. उनके साथ Axiom-4 के अन्य तीन सदस्य भी पृथ्वी पर वापसी कर चुके हैं. स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान सैन डिएगो के तट पर उतरा. इसी के साथ शुक्ला का नाम पहले भारतीय (जिन्होंने ISS पर कदम रखा) के रुप में दर्ज हो गया.

शुक्ला अपने तीनों साथी के साथ सोमवार सुबह 3:30 बजे (IST दोपहर 2 बजे) ड्रैगन अंतरिक्ष यान ग्रेस में सवार हुए. ISS पर 18 दिन बिताने के बाद पृथ्वी पर वापस लौट गए हैं. वापसी के लिए चालक दलों ने लगभग 23 घंटे की यात्रा तय किया. स्पेसएक्स ने X पर पुष्टि की कि डीऑर्बिट बर्न पूरा हुआ और यान का नोज़कॉन बंद कर पुनः प्रवेश सुनिश्चित किया गया.

ISS पर किए गए प्रयोग

चालक दल ने ISS पर लगभग 300 अधिक सूर्योदय और सूर्यास्त देखे. इसरो ने बताया कि शुक्ला ने सात सूक्ष्मगुरुत्व प्रयोग पूरे किए. इनमें टार्डिग्रेड्स के भारतीय स्ट्रेन, मायोजेनेसिस, मेथी, मूंग के बीजों का अंकुरण, साइनोबैक्टीरिया, सूक्ष्म शैवाल और फसल के बीजों पर काम शामिल था. वायेजर डिस्प्ले पर भी प्रयोग सफल रहे. इसरो ने इसे मिशन की बड़ी उपलब्धि बताया. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं. राकेश शर्मा 1984 में सोवियत मिशन पर गए थे. शुक्ला का यह मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते कद को दर्शाता है. 

स्पेसएक्स का योगदान

स्पेसएक्स ने मिशन की सफलता में अहम भूमिका निभाई. कंपनी ने X पर पोस्ट कर चालक दल का स्वागत किया. ड्रैगन यान के स्प्लैशडाउन की पुष्टि करते हुए स्पेसएक्स ने कहा कि पृथ्वी पर आपका स्वागत है. मिशन के लिए यान को पूरी तरह तैयार किया गया था. इसरो और भारत सरकार ने इस मिशन को ऐतिहासिक बताया. शुक्ला के प्रयोग अंतरिक्ष में भारतीय विज्ञान की प्रगति को दर्शाते हैं. मिशन से प्राप्त डेटा भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान में मदद करेगा. यह भारत के गगनयान मिशन की तैयारियों के लिए भी प्रेरणा है.

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