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स्ट्रोक से पहले मिलती है साइलेंट वार्निंग, 20 से 30 की उम्र में ना करें नज़रअंदाज़

जीवन में बढ़ती भाग दौड़ और खाने-पीने में आ रहे बदलाव के कारण लोगों की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. खास कर दिल का सेहत पहले के मुताबिक अब लोगों का ज्यादा खराब हो चुका है. वहीं दिमाग पर भी काफी ज्यादा भार है. लोगों को काफी कम उम्र में दिल और दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. लोगों को 30 तक की उम्र में कुछ बातों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए. जिससे आप पर स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है.

Calendar Last Updated : 12 December 2024, 11:58 AM IST
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Silent Warning Signs of Stroke:  बदलते दौड़ में युवा जिनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच है उनपर भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ता जा रहा है. यह एक खतरनाक स्थिति है, जो सामान्यतः बुजुर्गों से जुड़ी मानी जाती है. लेकिन अब अस्वस्थ जीवनशैली, तनाव, और बढ़ते स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यह समस्या युवा आबादी में भी देखी जा रही है. शोधों के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत स्ट्रोक के मामले 40 साल से कम उम्र के लोगों में होते हैं. खासतौर पर विकासशील देशों में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहां स्ट्रोक के रोगियों की औसत आयु विकसित देशों की तुलना में लगभग 15 वर्ष कम है.

क्यों बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा

1. गतिहीन जीवनशैली: नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी से शरीर में वसा का जमाव, मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं.
2. अस्वस्थ आहारच: अधिक मात्रा में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन, असंतुलित आहार, और अधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थ रक्तदाब और कोलेस्ट्रॉल स्तर को प्रभावित करते हैं.
3. धूम्रपान और शराब का सेवन: धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और थक्कों के निर्माण को तेज करता है, जो स्ट्रोक का कारण बन सकता है.
4. तनाव: लंबे समय तक काम करना, नींद की कमी और मानसिक दबाव स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं.
5. आनुवंशिक कारक: यदि किसी व्यक्ति के परिवार में स्ट्रोक का इतिहास है, तो वे भी अधिक खतरे में हो सकते हैं.

साइलेंट की चेतावनी ना करें अंदेखा

स्ट्रोक मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में रुकावट के कारण होता है जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. यदि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो इसे और गंभीर होने से रोका जा सकता है. स्ट्रोक के कुछ सामान्य चेतावनी संकेतों में शामिल हैं:

1. अचानक सुन्नता या कमजोरी: यह आमतौर पर शरीर के एक तरफ होता है, जैसे कि चेहरे, हाथ या पैर में.
2. बोलने या भाषण को समझने में कठिनाई: अचानक शब्दों को ठीक से बोलने या समझने में कठिनाई हो सकती है.
3. दृष्टि की हानि या धुंधली दृष्टि: एक आँख या दोनों आँखों में अचानक दृष्टि की समस्या.
4. सिरदर्द या चक्कर आना:  गंभीर सिरदर्द, अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के, या संतुलन की समस्या.
5. क्षणिक इस्केमिक अटैक (TIA):  इसे मिनी-स्ट्रोक भी कहा जाता है. इसके लक्षण ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह एक बड़े स्ट्रोक का अग्रदूत हो सकता है और तुरंत चिकित्सा ध्यान की आवश्यकता होती है.

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